अंकल गाड़ी रोको ट्रेन आ रही है, अंकल। यह वाक्य कैयरमऊ हादसे में घायल बच्चों के परिवार वालों का हर रोज सुनने को मिल रही है। मासूम बच्चों के दिमाग में घटना घर कर चुकी है। हादसे के शिकार बच्चे रात में सोते समय अंकल ट्रेन रोको जैसे वाक्य निकाल रहे हैं।
25 जुलाई को कैयरमऊ हादसे में आठ बच्चों की मौत हो गई थी जबकि आठ घायल हो गए थे। इलाहाबाद के जीवन ज्योति, वाराणसी के ट्रामा सेंटर और भदोही के एक निजी अस्पताल में उपचार के बाद घर आए बच्चों की मानसिक स्थिति पूर्व जैसे नहीं है। अभिभावक अजय मिश्रा ने कहा कि रेल मंत्रालय और प्रदेश सरकार ने मदद तो दे दिया है लेकिन उससे बच्चों की टूटी हड्डियां पहले जैसे नहीं हो सकेंगी। हादसे से जो सदमा उन पर लगा है वह आजीवन दिमाग पर ही रहेगी। तीन से चार आपरेशन बच्चों का हुआ है, जिससे उनके नाजुक शरीर की हालत ही खराब हो गई है। एक-एक घायल बच्चों पर तीन से चार लाख खर्च हो चुका है जबकि रेल और प्रदेश सरकार ने डेढ़ लाख मुहैया कराया है। भविष्य में कितना खर्च होगा यह आने वाला समय बताएगा। घायल प्रफुल्ल भी घटना से सदमें में है।