उनका कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर की सक्रियता भले कम हो जाए, लेकिन मन को व्यस्त रखना बेहद जरूरी है। आधुनिक पीढ़ी के पास अपनी व्यस्तता के कारण बुजुर्गों के साथ पहले जैसा समय बिताने का अवसर नहीं है। ऐसे में बुजुर्गों को भी खुद को व्यस्त रखने के लिए अपनी रुचि का काम तलाशना चाहिए।
पूनम देवी के लिए रुई की बत्तियां बनाना और फूलों को सजाना सिर्फ समय बिताने का जरिया नहीं, बल्कि मन की खुशी का माध्यम है। वह कहती हैं कि इस काम से दिनभर व्यस्त रहती हैं और मन को शांति मिलती है। मंदिरों में सामग्री भेजने से धार्मिक कार्यों में सहयोग का संतोष मिलता है, जबकि बच्चों को उपहार देने में उन्हें सबसे ज्यादा खुशी मिलती है। 76 की उम्र में उनकी सक्रिय दिनचर्या बुजुर्गों के लिए प्रेरणा बन गई है।