ज्ञानपुर। संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं वाले हमारे देश में शुरू से ही नदी, पेड़-पौधे और यहां तक की पशुओं को भी पूजने की परंपरा रही है। हमारे यहां पेड़-पौधों में देवी देवताओं का वास बताया जाता है। इसलिए विशेष दिनों पर उनकी पूजा पाठ का विधान किया जाता है। ऐसा ही एक पर्व हैं आंवला पेड़ की पूजा का, जो अक्षय नवमी के अवसर पर पूजा जाता है। इस बार अक्षय नवमी का पर्व दो नवंबर को पड़ रहा है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ने वाले इस पर्व पर भगवान विष्णु के साथ आंवला के पेड़ की पूजा का विधान हैं।
मान्यता है पेड़ की विधिवत पूजा अर्चना के बाद सपरिवार इसके नीचे बैठ कर भोजन करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही रोग, दोष और भय से छुटकारा मिलता है। इस पर्व को आंवला नवमी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार आंवला नवमी के दिन व्रत रखने के साथ आंवला के पेड़ की पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। आंवला नवमी के दिन दान पुण्य का काफी अधिक महत्व है। माना जाता है कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आंवले के पेड़ में विराजमान रहते हैं। इसलिए अक्षय नवमी के दिन विधिवत आंवला के पेड़ की पूजा करने के साथ इसकी छाया में बैठकर भोजन करना शुभ माना जाता है। इस दिन आंवला के पेड़ की पूजा करने के साथ 108 बार परिक्रमा करने से सभी कामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इसके साथ ही इस दिन व्रत करने से संतान की प्राप्ति होती है। जनपद में गोपीगंज के बड़े शिव मंदिर और ज्ञानपुर की घोपइला माता मंदिर में अक्षय नवमी के दिन बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा लगता है। श्रद्धालु विधिवत आंवले के वृक्ष का पूजन-अर्चन करने के उपरांत शुद्ध शाकाहारी भोजन बनाते हैं और सपरिवार पेड़ के नीचे ही बैठकर भोजन ग्रहण भी करते हैं।
डुहियां भावसिंहपुर निवासी आचार्य पंडित दीनानाथ शुक्ला का कहना है कि इस बार नवमी तिथि दो नवंबर बुधवार को रात नौ बजकर नौ मिनट तक रहेगी। जिसमें आंवला पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 6.34 से दोपहर 12.04 मिनट तक कुल पांच घंटे 31 मिनट की अवधि तक रहेगा। इस मुहूर्त में पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सुख समृद्धि का वास होता है। उन्होंने बताया कि अक्षय नवमी को आंवला की जड़ में जल में कच्चा दूध मिलाकर अर्पित किया जाता है। इसके साथ ही फूल, माला, सिंदूर, अक्षत आदि लगाने के साथ भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही तने में कच्चा सूत या फिर मौली आठ बार लपेट सकते हैं। पूजा के बाद पूरे परिवार के साथ पेड़ के नीचे बैठकर शुद्ध शाकाहारी भोजन किया जाता है।
आंवला के फलों में कुछ खास उछाल नहीं आया है। बाजार में आंवला के फल 60 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। ज्ञानपुर के सब्जी विक्रेता संदीप बिंद ने बताया कि पिछली बार आंवले का फल 50 रुपये किलो बिका था। इस बार 10 रुपये किलो उसका रेट बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर महिलाएं घरों में आंवले का अचार या मुरब्बा बनाने के लिए ले जाती हैं। हर सीजन में एक कुंतल तक आंवले की खपत हो जाती है।