बाबूसराय में जागरूकता पदयात्रा में शामिल बालिकाएं। स्रोत आयोजक
विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर मंगलवार को डॉ. शंभूनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन की ओर से नौ गांव में जागरूकता पदयात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्य में शामिल बालिकाएं और किशोरियों ने माहवारी पर खुलकर संवाद कर प्रेरक संदेश दिया। कहा कि अब झिझक को पीछे छोड़कर आगे बढ़ें। दीक्षा सिंह ने कहा कि माहवारी स्वच्छता आज भी समाज में उपेक्षित विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं बेहद सराहनीय हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बिचौलियों और अव्यवस्थाओं के कारण वास्तविक लाभार्थियों तक उनका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।
उन्होंने कहा हमारा उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि सरकारी की योजनाओं को हर जरूरतमंद किशोरी तक पहुंचाना है, ताकि कोई भी लड़की संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा या स्वास्थ्य से वंचित न रहे।
कहा कि 500 किशोरियों से वार्ता के बाद कई गंभीर बातें सामने आई। इसमें शामिल लड़कियों ने बताया कि जन औषधि केंद्रो पर किशोरियों को पैड नहीं मिलता। 50 प्रतिशत किशोरियों ने स्वीकार किया कि स्कूलों में इस्तेमाल किए गए पैड के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था न होने के कारण वे माहवारी के दिनों में स्कूल जाने से कतराती हैं। लड़कियों ने अपने परिजनों के साथ हाथों में तख्तियां लेकर जागरूकता रैली निकाली और लोगों को माहवारी से जुड़े मिथकों को तोड़ने का संदेश दिया।
पदयात्रा के बाद आयोजित संवाद शिविर में किशोरियों ने बिना किसी झिझक के माहवारी से जुड़े सवाल पूछे। यह संदेश दिया कि पीरियड्स कोई शर्म या बीमारी नहीं, बल्कि सामान्य जैविक प्रक्रिया है।