बताया जा रहा है कि कुछ देर बाद उन्होंने अपनी लाइसेंसी राइफल से सिर में गोली मार ली। गोली की आवाज सुनाई नहीं पड़ी, लेकिन जब खाना लेकर नौकर कमरे में पहुंचा तो वह दृश्य देखकर स्तब्ध रह गया। कमरे में अन्नू सिंह का शव खून से लथपथ पड़ा था। उसने तुरंत परिवार और आसपास के लोगों को सूचना दी।
घटना की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर जुट गए। सूचना पर गोपीगंज कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम को बुलाकर घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कराया और लाइसेंसी राइफल को कब्जे में लेते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मृतक के भाई संजय सिंह ने थाने में तहरीर देकर बताया कि अन्नू सिंह पिछले तीन वर्षों से मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और उनका इलाज चल रहा था। पुलिस इस पहलू को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।
अन्नू सिंह एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से संबंध रखते थे। उनके पिता स्वर्गीय ज्वाला सिंह और चाचा दिनेश सिंह ज्ञानपुर क्षेत्र के पूर्व ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। अन्नू सिंह स्वयं भी वर्ष 2005 में काशी नरेश राजकीय महाविद्यालय (केएनपीजी) से छात्रसंघ चुनाव लड़ चुके थे।