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सचिव-प्रधान उदासीन, खाते में छह करोड़ डंप

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ज्ञानपुर। स्वच्छ भारत मिशन को लेकर सरकार भले ही गंभीर है लेकिन सचिव और प्रधान इसको लेकर उदासीन है। लापरवाही के चलते लाभार्थियों तक प्रोत्साहन राशि नहीं पहुंच पा रही है। जिससे ग्राम पंचायत के स्वच्छता मिशन के खाता छह में छह करोड़ रूपये डंप है। मिशन के निदेशक सख्त हुए तो विभागीय स्तर से ग्राम पंचायतों से पैसा मंगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर में शौचालय निर्माण कराया जाना है। करीब छह साल में जिले की 561 ग्राम पंचायतों में दो लाख 40 हजार से अधिक शौचलय बनाए गए। इसके लिए ग्राम पंचायतों के खाता छह में 20 से लेकर 50 लाख तक की रकम भेजी गई। जिला पूर्णरूप से खुले में शौच मुक्त घोषित हो चुका है, लेकिन धरातल पर तस्वीर बदरंग है। बिना छत और फाटक के खड़े अधूरे शौचालय प्रशासन के इस दावे की पोल खोलते हर गांव में मिल जाएंगे। लाभार्थी शौचालय की धनराशि के लिए ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक और विकास विभाग तक चक्कर लगाते हैं। उन्हें शौचालय की धनराशि नहीं मिल पा रही है। शौचालय का लक्ष्य तो पूर्ण हो चुका है लेकिन 20 से 25 हजार पात्र परिवार दूसरी किश्त के इंतजार में हैं और शौचालय के अभाव में खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। जिला पंचायत राज विभाग के आंकड़ो पर नजर डाली जाए तो 561 ग्राम पंचायतों में पांच करोड़ 98 लाख डंप पड़ा है। जिला पंचायत राज अधिकारी बालेशधर द्विवेदी ने कहा कि निदेशक के निर्देश पर ग्राम पंचायतों से डंप रकम मंगाई जा रही है। विभाग की ओर से पांच हजार के करीब नए लाभार्थियों का चयन कर उनके खाते में पैसा भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए हर गांव में प्रोत्साहन राशि भेजी गई। 180 से 200 करोड़ के ब्याज से यह पैसा खाते में पड़ा है।
ऊपली और भूंसा बढ़ा रहे शौचालय की शोभा
ज्ञानपुर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में छह साल के दौरान दो लाख 40 हजार शौचालय का निर्माण कराया गया, हालांकि अधिकतर ग्राम पंचायतों में शौचालय की दशा राम भरोसे ही है। डीघ ब्लॉक के केवटाही गांव में कई शौचालयों में ऊपली रखा गया है। यह तो एक बानगी है। कई ग्राम पंचायतों में ऐसी स्थिति देखने को मिल जाएगी।
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कई प्रधानों की नप चुकी है गर्दन
ज्ञानपुर। शौचालय के निर्माण में मिलने वाले प्रोत्साहन राशि में भी जमकर धांधली की गई। जिले के दर्जन भर से अधिक प्रधानों और सचिवों की गर्दन इसमें फंस चुकी है। भदोही के परगासपुर का मामला हो या औराई के हरिनारायणपुर, बरजी आदि गांव का नाम शामिल हो। मोढ़ के जमुनीपुर अठगवां गांव में भी शौचालय निर्माण में 50 लाख से अधिक का गोलमाल भी सामने आ चुका है।
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