ज्ञानपुर/औराई। जिले की 561 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही सभी ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की निगरानी छह प्रशासक देखेंगे। प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने से सचिवों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अब सचिव और प्रशासक मिलकर अधूरे कार्यों को पूर्ण कराएंगे। बृहस्पतिवार शाम को शासन से पत्र आने के बाद ग्राम प्रधानों के सभी खातों से भुगतान पर रोक लगा दी गई। खाते से धन का आहरण न हो, इसके लिए सभी बैंक प्रबंधकों को पत्र भी जारी किया गया।
लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत हर पांच साल पर प्रधानी का चुनाव होता है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2015 में निर्वाचित प्रधानों के चुनाव परिणाम की घोषणा 13 दिसंबर को की गई थी, लेकिन ग्राम पंचायतों का गठन करने के बाद पहली बैठक 26 दिसंबर को हुई थी। कोरोना वायरस के कारण 2020 में होने वाला चुनाव मार्च तक संभावित है। ऐसे में 25 दिसंबर को सभी प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधान मुक्त हो जाएंगे। शासन के निर्देश पर सभी छह ब्लॉकों के एडीओ पंचायत प्रशासक बनाए गए हैं। प्रशासक के साथ मिलकर सचिव अधूरे कार्यों को पूर्ण कराएंगे। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो स्वच्छ भारत मिशन, राज्य वित्त और 15वें वित्त से पांच साल में ग्राम पंचायतों में करीब 400 करोड़ रुपये के कार्य कराए गए हैं। कार्यकाल खत्म होते देख प्रधान बृहस्पतिवार को ब्लॉकों पर जमे रहे। विभिन्न मदों के चेक जारी कराने से लेकर अन्य गतिविधियां होती रहीं। जिले की 561 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय, पंचायत भवन सहित अन्य विकास कार्यों से जुड़े 100 करोड़ से अधिक काम प्रगति पर हैं। अब इनको पूर्ण कराने की जिम्म्मेदारी प्रशासक और सचिव पर होगी। औराई संवाददाता के अनुसार, ब्लॉक क्षेत्र की 125 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होते देख बृहस्पतिवार को औराई ब्लॉक पर प्रधानों का जमावड़ा लगा रहा। वर्तमान प्रधान पर नजर रखने के लिए आगामी पंचायत चुनाव में प्रधान पद के लालायित भावी प्रत्याशी भी ब्लॉकों पर निगरानी करते दिखे। सूत्रों की मानें तो कार्यकाल समाप्त होने के मद्देनजर गुजरे एक सप्ताह में करीब 10 करोड़ से अधिक के कार्यों की फाइलों को फाइनल किया गया।
जिले के सभी 561 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 25 दिसंबर को पूरा हो जाएगा। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की देखरेख के लिए जिले के सभी छह ब्लॉकों के एडीओ पंचायतों को प्रशासक का जिम्मा सौंपा गया है। एडीओ पंचायत अपने ब्लॉक के सभी ग्राम पंचायतों में तैनात सचिवों के साथ मिलकर अधूरे विकास कार्यों को प्राथमिकता से निपटाएंगे। जिन ब्लॉक में एडीओ पंचायत नहीं है वहां दूसरे एडीओ प्रशासक तय होंगे। शासन का पत्र आने पर प्रधान के खातों से आहरण पर रोक लगा दी गई है।
भानु प्रताप सिंह, सीडीओ भदोही।