मोढ़। गरीबों को सस्ते दर पर राशन मुहैया कराने की मुहिम कोटेदारों के जाल में उलझकर रह गई है। अनाज की कालाबाजारी के लिए लोगों के धर्म बदलने में भी गुरेज नहीं किया। जमुनीपुर अठगवां गांव में मुस्लिम मुखिया के पूरे परिवार को हिंदू बना लिया। लॉकडाउन में राशन वितरण के सत्यापन में गड़बड़झाला सामने आने लगा है।
16 लाख की आबादी वाले जिले में कुल तीन लाख 50 हजार पात्र गृहस्थी और अंत्योदय कार्डधारक हैं। राशन वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार आधुनिक व्यवस्था को प्रभावी कर रही है, लेकिन कोटेदार उनसे आगे निकल जा रहे हैं। आधार कार्ड और पॉस मशीन होने के बाद भी राशन की कालाबाजारी के लिए रास्ता ढूढ़ ले रहे हैं। सुरियावां विकास खंड के जमुनीपुर अठगवां गांव में रशन कार्ड बनाने में बड़ी चूक सामने आई है। यहां पर फरीदा बानो के नाम राशन कार्ड बना है, जबकि उनकी देवरानी में बटूसा देवी, बहू रीता, सरोज पांडेय और बेटी अमन शामिल हैं। इसी तरह खुर्शीदा बानों के राशन कार्ड में ज्वाला सिंह, सुनीता देवी, पिंकी, दुर्गावती और सीमा यादव शामिल है। यह तो एक बानगी है। करीब दर्जन भर ऐसे कार्ड बने हैं, जिनके मुखिया और परिवार में कोई मेल ही नहीं है। सलमा और खुर्शीदा नाम की मुखिया के राशन कार्ड में सीता, गीता, रीता आदि नामों के सदस्यों को जोड़ा गया है, जिनकी यूनिट का राशन कहां जा रहा है, कोई नहीं जानता। इससे राशन वितरण प्रणाली की गड़बड़ियां उजागर होने लगी हैं। खुर्शीदा बानो ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की। जिला पूर्ति अधिकारी अमित कुमार तिवारी ने कहा कि कार्डों में गड़बड़ी का मामला संज्ञान में है। सभी कार्डों में सुधार के लिए उसे मंगाया गया है। लॉकडाउन के कारण इस बार बिना कार्ड वालों को भी राशन दिया जाएगा।
कोटेदार पर दर्ज हो चुका है केस
मोढ़। राशन वितरण में गोलमाल करने पर जमुनीपुर अठगवां के कोटेदार पर मुकदमा दर्ज हो चुका है। राशन कार्ड बनाने में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई इसको लेकर भी जांच शुरू हो गई है। पूर्ति विभाग के कुछ कंप्यूटर आपरेटरों पर भी कार्रवाई हो सकती है।