कार्यशाला संचालकों ने प्रबंधक के रूप में अध्यापकों की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीनिवास पांडेय ने कहा कि एक अच्छे अध्यापक को कुशल प्रबंधक भी होना चाहिए। इससे शिक्षण की प्रक्रिया गुणवत्ता और विवेकपूर्ण संचालित होती है। छात्रों को भी इसका आपेक्षित लाभ मिलता है।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में क्रिया कलाप, द्वितीय सत्र में प्रशिक्षुओं को विभिन्न समूहों में बांटकर विद्यालय आधारित क्रिया कलापों की चर्चा कराई गई।
तृतीय सत्र में डॉ. संतोष आर्या ने प्रबंधक के रूप में अध्यापक की भूमिका पर प्रकाश डाला। कहा कि शिक्षक की भूमिका समाज को दिशा देने में महत्वपूर्ण होता है।
चौथे सत्र में प्राध्यापकों द्वारा पाठ्य सहगामी क्रियाओं के प्रबंधक की महत्वा बताई गई। इस मौके पर डॉ. हरीश सिंह, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. लोकपति त्रिपाठी, डॉ. जय सिंह आदि मौजूद रहे।