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श्रद्धा और विश्वास के प्रतीक हैं शिव पार्वती : साधना शास्त्री

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सीतामढ़ी। धार्मिक और पौराणिक स्थल सीतामढ़ी में लवकुश जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित नौ दिवसीय अखिल भारतीय राष्ट्रीय रामायण मेले में रविवार को देवरिया की साधना शास्त्री ने सती चरित्र की कथा सुनाई। कथा वाचन करते हुए उन्होंने कहा कि कथा सुनने से ही ईश्वर दर्शन की योग्यता प्राप्त होती हैं। सती ने सीता जी का रूप बनाकर परीक्षा ली और शिव से झूठ बोला। जिससे शिव जी ने सती का त्याग कर दिया। पुनः समाधि से उठने के बाद भगवान शंकर कथा सुनाते हैं, पर उनका मन कथा में न लगा और मायके जाने की जिद करने लगी। मायके में जब अपने पति का अपमान पिता के द्वारा देखा तो क्रोध में शरीर त्याग दिया और पार्वती रुप में शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। जिससे उन्हें शिव जी पति रुप में प्राप्त हुए। शिव पार्वती श्रद्धा और विश्वास के प्रतीक हैं। दोनों जब साथ मिलते हैं तो राम कथा की गंगा प्रवाहित होने लगती हैं। इस दौरान मुन्नालाल पांडेय, धर्मेंद्र सिंह, दिनेश सिंह, संजय सिंह चौहान, सज्जन प्रजापति, सरकार शुक्ल, बसंतलाल गौड़, रमाशंकर मौजूद रहे।
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