जनगणना की ऑनलाइन स्वगणना प्रक्रिया तकनीकी दिक्कतों में उलझती नजर आ रही है। कहीं सर्वर बार-बार ठप हो रहा है तो कहीं जीपीएस मकान की सही लोकेशन ही नहीं खोज पा रहा है।ऐसे में लोग ऑनलाइन स्वगणना का प्रयास छोड़कर प्रगणकों के घर आने का इंतजार कर रहे हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी मकान की लोकेशन दर्ज करने में सामने आ रही है। पोर्टल पर जीपीएस ऑन करने के बावजूद घर की लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही। किसी का मकान दूसरे मोहल्ले में दिख रहा है तो किसी की लोकेशन बार-बार बदल जा रही है। नई कॉलोनियों और ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या और गंभीर बनी हुई है। स्थिति यह है कि मोबाइल हाथ में लेकर घर के बाहर और गलियों में घूमने के बाद भी सिस्टम सही लोकेशन नहीं पकड़ रहा। खड़सरा निवासी मधुरेंद्र सिंह ने बताया कि 15 से 20 बार प्रयास करने के बाद भी स्वगणना पूरी नहीं हो सकी। लॉगिन के बाद किसी तरह घर की लोकेशन जीपीएस पर कंफर्म की, लेकिन इसके बाद आगे बढ़ने के लिए ‘सेव’ और ‘नेक्स्ट’ विकल्प ही नहीं खुला। हर बार प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ रही है। जगदरा निवासी चंद्रप्रकाश का कहना है कि कई बार कोशिश करने के बावजूद पोर्टल उनके मकान की लोकेशन नहीं खोज पाया। पंदह निवासी अनूप राय ने बताया कि ओटीपी आने में इतना समय लग जा रहा कि तब तक पेज ही एक्सपायर हो जा रहा है।
वहीं करमौता निवासी अतुल राय ने बताया कि नाम, पता और परिवार के सदस्यों का विवरण भरने के बाद भी डेटा सेव नहीं हो रहा। कई बार ‘सबमिट’ और ‘नेक्स्ट’ बटन काम करना बंद कर दे रहे हैं। इसके अलावा मोबाइल फोन पर पोर्टल सही तरीके से नहीं खुलने और हिंदी फॉन्ट में गड़बड़ी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। इंटरनेट की थोड़ी धीमी गति होते ही पूरी प्रक्रिया अटक जा रही है।
जनसेवा केंद्र संचालक संतोष सिंह का कहना है कि पहली बार बड़े स्तर पर डिजिटल लोकेशन टैगिंग और ऑनलाइन सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई है। ऐसे में शुरुआती दिनों में सर्वर पर बढ़े दबाव और तकनीकी समन्वय की कमी के कारण समस्याएं सामने आ रही हैं। बताया कि तकनीकी खामियां जल्द दूर नहीं हुईं तो बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन स्वगणना से दूरी बना लेंगे।