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Bhadohi News: कालीन उद्योग के लिए नई समस्या बन सकती है यूएस ट्रेड एक्ट की धारा 301

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भदोही के एक प्रतिष्ठान में कालीनों की फिनिशिंग करते कारीगर। स्रोत-संवाद
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भदोही। अमेरिका विभिन्न देशों पर व्यापारिक समझौतों की आड़ में उच्च टैरिफ दर थोपने के लिए नए-नए कारण ढूंढ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप सेक्शन 301 (अमेरिकी व्यापार एवं प्रतिनिधित्व) के अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए भारत समेत 16 देशों में व्यापारिक जांच के आदेश दिए हैं। इस आदेश के बाद से केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय कालीन उद्योग सहित अन्य मजदूर बहुलता वाले उद्योगों से डाटा मांगा है। यह डाटा अमरीका को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद टैरिफ की नई दरें लागू हो सकती है।
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भारतीय कालीन निर्यातकों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लोगों को अभी भी याद है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अचानक भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 5 प्रतिशत से बढ़ाकर पहले 25 प्रतिशत और फिर रूस से तेल खरीदने से नाराज होकर टैरिफ की दर 50 प्रतिशत तक कर दिया था। कई महीने बाद टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत तो किया लेकिन अब ट्रंप ने अमरीका के ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन-301 की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
ऑल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के मानद सचिव पीयूष बरनवाल ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के साथ वर्चुअल बैठक में शामिल होने के बाद बताया कि ट्रंप प्रशासन के इस कदम के बाद वाणिज्य मंत्रालय विभिन्न उद्योगों से डाटा कलेक्शन करने में जुट गया है। डाटा अमरीकी प्रशासन को सौंपे जाने के बाद 28 अप्रैल तक धारा 301 समिति के समक्ष सुनवाई शुरू होगी। यदि सेक्शन 301 समिति चाहेगी तो टैरिफ की दर बढ़ा सकती है। इतना ही नहीं ऐसे समय जब इरान-इस्राइल युद्ध चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्थिति दयनीय हो चुकी है। ऐसे में अधिनियम 301 भारतीय कालीन उद्योग के लिए नई मुसीबत खड़ी कर सकती है।
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क्या है यूएस व्यापार अधिनियम की धारा 301
एकमा के मानद सचिव पीयूष बरनवाल ने बताया कि अमेरिका के व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 में उन्हें विदेशी व्यापार प्रथाओं की जांच करने और उनके कार्रवाई करने का अधिकार देती है। इस अधिनियम के तहत अमेरिका ने भारत सहित 16 देशों से डाटा की मांग की है। इस अधिनियम के तहत अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि मजदूरों के अनुरूप वातावरण में काम कर रहे हैं या नहीं। बंधुआ मजदूरी तो नहीं कराई जा रही है। मजदूरों की क्षमता से अधिक काम तो नहीं लिया जा रहा है। जांच में कपड़ा, इस्पात, एल्युमीनियम, ऑटोमोबाइल, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, मशीनरी व सोलर उद्योग शामिल हैं।
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