सहकारी समिति सचिवों की हड़ताल से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शुक्रवार को खाद और बीज लेने पहुंचे किसानों को जिले की 48 साधन सहकारी समितियों पर ताला लटका मिला। सुबह से शाम तक किसान समितियों के चक्कर काटते रहे, लेकिन डीएपी नहीं मिलने पर मायूस होकर लौट गए। रबी फसलों और आलू की बोआई के सीजन में खाद की उपलब्धता प्रभावित होने से किसानों को निजी दुकानों से डीएपी खरीदनी पड़ रही है। जिले में कुल 52 सहकारी समितियां हैं। इनमें से 48 समितियों पर रबी और खरीफ सीजन में खाद-बीज का वितरण होता है। आलू की बोआई अंतिम दौर में है, जबकि धान की कटाई के साथ अगैती गेहूं की बोआई भी शुरू हो गई है। आगामी बोआई के लिए किसान डीएपी का इंतजाम करने में जुटे हैं। इसी बीच वेतन विसंगति, नियमितीकरण और 15 सूत्री मांगों को लेकर समितियों के सचिव और कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं।
शुक्रवार को अभोली के शेरपुर गोपलहां, औराई के पिलखनी, डीघ के जगापुर और कुरमैचा तथा भदोही के अमवां और हरिपुर स्थित समितियों की पड़ताल की गई। सभी जगह ताले लटके मिले। खाद लेने पहुंचे किसानों को इंतजार के बाद खाली हाथ लौटना पड़ा। हड़ताल कब खत्म होगी और समितियों पर वितरण कब शुरू होगा, इसे लेकर असमंजस बना हुआ है।
एक घंटे इंतजार के बाद लौटे किसान
डीघ के जगापुर मिश्रान स्थित समिति पर ताला लगा होने के कारण किसान रत्नेश और योगेश करीब एक घंटे तक इंतजार करते रहे। इसके बाद उन्हें बिना डीएपी लिए लौटना पड़ा। वहीं, अभोली के शेरपुर गोपलहां और औराई के पिलखनी स्थित समितियों पर भी खाद लेने पहुंचे किसानों को निराशा हाथ लगी।
समिति सचिवों की मांग जायज है। हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, समितियों से डीएपी का वितरण नहीं करेंगे।
— गणेश सिंह, जिलाध्यक्ष, सहकारी समिति।
समितियों पर पर्याप्त मात्रा में डीएपी उपलब्ध है। कुल 1223 मीट्रिक टन में से 600 मीट्रिक टन खाद समितियों पर भेजी गई है। सचिवों की हड़ताल से वितरण प्रभावित हुआ है। उम्मीद है कि दो से तीन दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी।
- राम प्रकाश, एआर कोऑपरेटिव।