ज्ञानपुर। निर्माण में मानक की अनदेखी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मुसीबत बन गया है। जिले के 150 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय के 334 भवन जर्जर हो चुके हैं। कहीं हल्की बारिश में भी भवन की टपकती छत तो कहीं फटी दीवारों के चलते शिक्षक से लेकर बच्चों तक में सुरक्षा को लेकर भय बना रहता हैं।
बुनियादी शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सरकार तमाम योजनाएं चला रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट ही दिखती है। मानक के अनुसार भवनों का निर्माण नहीं होने से वे निर्माण के बाद जल्द ही जर्जर हो रहे हैं। जिले में जूनियर और प्राइमरी के कुल 1116 विद्यालय हैं। इनमें से 25 फीसदी विद्यालय एक दशक पुराने हैं। इनकी छतें, दीवारें, फर्श, खिड़की, दरवाजे सब कुछ जर्जर हो गए हैं। 75 फीसदी भवन सर्व शिक्षा अभियान के तहत 2005 से 2013 तक बनवाए गए। मानक के अनुरूप निर्माण नहीं होने से इन स्कूलों के भवन कम समय में ही जर्जर होने लगे हैं। नामांकित बच्चों को बैठने के लिए कोई दिक्कत न झेलनी पड़े प्रति वर्ष एक कक्षीय और दो कक्षीय भवन निर्माण के लिए भी धन जारी किया जा रहा है। इससे इतर भवनों के निर्माण में की गई मनमानी है आलम यह है कि अल्पसमय के निर्मित विद्यालय भवनों की कहीं छत टपक रही है तो कहीं दीवारें फट चुकी हैं। इससे हल्की सी बारिश के बाद भवनों में बच्चों के लिए बैठना मुश्किल हो जाता है।
महकमें की ओर से तैयार रिपोर्ट में ज्ञानपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय शिवरामपुर, बड़वापुर, कुसौली, बयावं, डीघ के प्राथमिक विद्यालय रामकिसुनपुर बसहीं, नौधन फकिरान बस्ती, भदोही में प्राथमिक विद्यालय लठियां, बरदहां, कनेहरी, भगौतीदासपुर समेत कुल 334 स्कूलों में कहीं छत टपकने की बात कही गई है तो कहीं दीवारें जर्जर हो चुकी हैं। जिला समन्वयक निर्माण शिवम सिंह ने बताया कि शासन की ओर से रिपोर्ट मांगी गई थी। पूरे जिले से 334 विद्यालयों में भवन जर्जर होने की रिपोर्ट भेजी गई है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई बारिश के बाद खंड शिक्षा अधिकारियों की भेजी गई रिपोर्ट में यह बात सामने आई। विभाग ऐसे भवनों की आरईएस के अभियंताओं से जांच कराएगा।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार ने कहा कि जर्जर स्कूलों की रिपोर्ट मांगी गई थी। ब्लॉकों से रिपोर्ट आने के बाद उसे भेजा गया है। शासन से बजट मिलने पर भवनों को सही कराया जाएगा।
1.47 लाख बच्चे अध्ययनरत
ज्ञानपुर। जिले के 1116 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में करीब एक लाख 47 हजार बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में 334 जर्जर भवनों में करीब 15 से 20 हजार बच्चे पढ़ते हैं। नए शिक्षा सत्र से पूर्व इन भवनों को सुधारना अत्यंत जरूरी है।