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पांच लाख की दवाओं का सैंपल फेल, जब्त

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ज्ञानपुर। जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर आम आदमी के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाली पांच लाख की दवाओं का सैंपल फेल हो गया है। नकली दवाओं को जब्त कर औषधीय प्रशासन विभाग ने कंपनियों के खिलाफ वाद दाखिल किया है।
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वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण दो वर्षों तक दवाओं की जांच प्रभावित हुई। इस दौरान कई कंपनियों की ओर से बाजार में नकली दवाओं की खेप भी उतार दी गई। जांच न होने से वह दवाएं मेडिकल स्टोर के माध्यम से लोगों के घरों तक पहुंच गई। संक्रमण काल का दौर हटा तो जुलाई में खाद्य एवं औषधीय प्रशासन विभाग की ओर से अभियान चलाकर मेडिकल स्टोर पर दवाओं की जांच की गई। जिसमें दवाओं का सैंपल जांच के लिए भेजा गया। अब उनका सैंपल फेल होने पर दवाओं को जब्त किया गया।
प्रभारी औषधि निरीक्षक एके बंसल ने बताया कि जीवन रक्षक दवाओं का सैंपल चार और 30 जुलाई को लिया गया। जिसे जांच के लिए राजकीय जनविश्लेषक प्रयोगशाला लखनऊ भेज दिया गया। सितंबर में आई रिपोर्ट में सीफीएक्साईम, जेवीक्लेव-डीएस सस्पेंशन, पोटैशियम कैल्विनेट, एमोक्सीजेलीन, पेप्राक्लीन, तेजोबाक्टम इंजेक्शन समेत कई अन्य बहुपयोगी दवाएं नकली निकली। उनकी आईपी मात्रा काफी कम रही। करीब पांच लाख की नकली दवाओं को सीज कर दिया गया। निर्माण कंपनी एमएस केयर फार्माट्युकिल्स रायपुर-सोलान, एमएस साईं बालाजी बाडी, एमएस स्को हिंद लैब, एमएस जीएनबी मेडिका एण्ड वंश फार्माट्युकिल्स बाडी के खिलाफ वाद दर्ज कराया गया है।
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ग्रामीण अंचलों में फैला है नकली दवाओं का दायरा
ज्ञानपुर। औषधीय निरीक्षक एके बंसल ने बताया कि ग्रामीण अंचलों में कम पढ़े लिखे होने के कारण नकली दवाओं का कारोबार अधिक रहता है। यह दवाएं स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होती हैं। बताया कि भदोही के साथ जौनपुर और वाराणसी जिलों का भी प्रभार उनके पास है। इससे जांच प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि अब तक कुल 15 मामले दर्ज हैं और पांच मामले विचाराधीन हैं।
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