ज्ञानपुर/लालानगर। कोरोना वायरस की मार से सैलून कारोबार भी अछूता नहीं रहा। करीब डेढ़ माह की बंदी ने उनकी कमर तोड़ कर रख दी। इससे कारोबार से जुड़े लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गए है। शासन-प्रशासन से भी इन कारीगरों को अब तक कोई मदद नहीं मिली है। इससे परिवार चलाना इनके लिए मुश्किल हो गया है। चौथे लॉकडाउन में दुकानें खुली जरूरी, लेकिन ग्राहकों की संख्या काफी कम है।
जिले में 1200 से 1500 छोटी-बड़ी सैलून की दुकानें हैं। जिस पर दो से तीन हजार कारीगर काम करते हैं। कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के तीन चरणों में सैलून पूरी तरह बंद रहे। चौथे चरण के लॉकडाउन में दुकानें खुली जरूर, लेकिन प्रवासियों के आने और कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के कारण भयवश से दाढ़ी और बाल कटवाने से भी लोग कतरा रहे। अधिकतर लोग घरों पर ही मशीन आदि मंगाकर खुद सैलून से जुड़े काम कर रहे। कुछ कारीगर घर-घर जाकर आर्थिक समस्या से कुछ राहत पा रहे, लेकिन वह नाकाफी हो रहा। चौथे लॉकडाउन में प्रशासन की ओर से सप्ताह में तीन दिन ही दुकान खोलने की अनुमति दी गई है, जिससे दुकानदार नुकसान की भरपाई भी नहीं कर पा रहे।
- लॉकडाउन के कारण सैलून कारोबारियों को काफी नुकसान हुआ। माह भर तो दुकानें पूरी तरह बंद रही, छूट मिलने पर ग्राहक दुकानों पर नहीं आ रहे। सैनिटाइजर, मास्क समेत अन्य सुविधाएं होने के बाद भी लोग दहशत में हैं। - राजू शर्मा।
-सैलून का व्यापार कोरोना वायरस के कारण गर्त में चला गया है। स्थितियां इतनी भयावह हो गई है कि सैलून के व्यापार से खुद का पेट भरे या परिवार का जीविकोपार्जन चला सके। प्रशासनिक सुविधाएं भी नहीं मिल रही। दिलीप शर्मा
- लॉकडाउन से डेढ़ माह की बंदी से व्यापार पहले ही चौपट हो चुका है। प्रशासन की ओर से राहत दी गई, लेकिन व्यापार पांच फीसदी हो पा रहा है। नुकसान की भरपाई को पूरा करने में छह माह से अधिक समय लगेगा। - राजेश शर्मा
- सैलून कारोबारी वैसे भी आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। लॉकडाउन से उन्हें करारी चपत लगी। सप्ताह में तीन दिन खोलने का निर्देश प्रशासन से मिला है। ऐसे में पहले से ही परेशान व्यापारियों को राहत मिलना मुश्किल है। - रोहित शर्मा।