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आरटीई : शुल्क पूर्ति के लिए 1.22 करोड़

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ज्ञानपुर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) तहत आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को पढ़ाने वाले 143 कान्वेंट स्कूलों को एक करोड़ 22 लाख की संजीवनी मिल गई है। करीब पांच साल बाद शुल्क पूर्ति की रकम मिलने से प्रबंधन को सहूलियत मिलेगी। यही नहीं, कान्वेंट में पढ़ने वाले 1025 बच्चों की कॉपी-किताबें संग अन्य खर्च के लिए 51.25 लाख रुपये भी आवंटित किए गए हैं।शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कान्वेंट स्कूलों में 25 फीसदी सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। साल 2017-18 से 2021-22 तक करीब ढाई हजार बच्चों को 143 स्कूलों में प्रवेश दिया गया। हर साल बच्चों का खर्च तो आया, लेकिन स्कूल प्रबंधन को फीस की प्रतिपूर्ति की रकम नहीं आई। इस पर स्कूल प्रबंधन ऐसे बच्चों के प्रवेश में आनाकानी करने लगे। नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले ही शासन ने फीस प्रतिपूर्ति के लिए एक करोड़ 22 लाख 50 हजार 750 रुपये जारी कर दिए। कुल 143 विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत नामांकित 2559 बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति की जाएगी। हालांकि यह धनराशि बहुत कम है। विभाग ने स्कूलों की शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए धनराशि की मांग भेजी है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह ने बताया कि दुर्बल एवं मध्यम परिवार के बच्चों को आरटीई के तहत निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश दिलाया जाता है। पिछले कई साल से आरटीई शुल्क प्रतिपूर्ति न होने से निजी स्कूलों का इस व्यवस्था से मोहभंग हो रहा था। इसके चलते आरटीई के तहत आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश कराना अधिकारियों के लिए कठिन हो गया था। एक करोड़ 22 लाख रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि जिले में पहुंचने से निजी स्कूलों ने राहत की सांस ली है। इस बार दाखिले को लेकर समस्या नहीं आएगी
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ज्ञानपुर। गरीब बच्चों को पढ़ाने वाले कान्वेंट स्कूलों को अधिकतम 450 रुपये महीने फीस की भरपाई की जाएगी। कई नामी गिरामी स्कूलों ने फीस पूर्ति के लिए ढाई हजार से चार हजार महीने का बिल बनाया है, लेकिन उतना मिलेगा नहीं। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि शासन की गाइडलाइन में अधिकतम 450 रुपये ही प्रतिपूर्ति की जानी है।
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