इतना लंबा रोजा लगभग 36 साल बाद आया है। पहला रोजा पूरा करने वालों की मानें तो भूख से दिक्कत तो नहीं हुई, लेकिन प्यास जरूर महसूस हुई। पहला रोजा होने के नाते बड़ों के साथ-साथ बड़ी संख्या में बच्चों ने भी रोजा रखकर मिसाल पेश की।
सुबह 3.38 बजते ही मस्जिदों से सहरी खत्म होने का ऐलान हुआ। पहला दिन होने के नाते बहुत लोगों की नींद देर से खुली। कई मस्जिदों से लोगों को सहरी के वक्त नींद से उठाया गया। इस दौरान लोगों ने अपने-अपने तरीके से सहरी किया।
बहुत से लोगों ने देर से उठने पर सहरी में केवल पानी पीकर काम चलाया। दोपहर बाद तक लोगों को भूख तो महसूस नहीं हुई, लेकिन प्यास ने मुश्किलें बढ़ाईं। शाम को 6.53 बजे विभिन्न मस्जिदों के अलावा लोगों ने घरों में इफ्तार किए, जिसमें शरबत और ठंडा पानी से लोगों ने गला तर किया।
गर्मी का आलम देखते हुए बर्फ की दूकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ लगी रही। छह रुपये किलो तक बर्फ की बिक्री हुई। जबरदस्त गर्मी और उमस के बीच लोगों को शाम तक बारिश की भी उम्मीद थी, लेकिन बारिश नहीं हुई। रोजा रखने वालों का कहना है कि अल्लाह तरह-तरह से अपने बंदों का इम्तिहान लेता है और यह इम्तिहान देने के लिए उन्होंने मजबूत इरादा कर लिया है। गर्मी में दिनभर जो सड़कें सूनी थीं वे शाम को इफ्तार के बाद फिर से गुलजार हो उठीं। शाम इफ्तार के बाद अजिमुल्लाह चौराहे पर फिर से गुलजार हो उठा। इस दौरान खरीदारों के अलावा चाय पान की दूकानों पर काफी वक्त बिताया। बाद नमाज एशा तरावीह के लिए मस्जिदें खचाखच भरी थीं।