आरओ का पानी उपलब्ध कराने के नाम पर जिले भर में आरओ संचालक बीमारी बांट रहे हैं। जांच में पानी का सैंपल फेल होने के बाद भी आरओ सप्लाई की दूकान तेजी से चल रही है। पानी की काली कमाई को जानते हुए भी विभागीय अफसर अनजान बने हुए हैं।
जिले में करीब 12 आरओ प्लांट संचालित हैं लेकिन एक का भी लाइसेंस नहीं बना है, सभी अवैध ढंग से चल रहे हैं। गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही ठंडे पानी की आमद बढ़ जाती है। पानी का स्टेटा भी नीचे जाने से शुद्ध पानी नहीं मिल पाता। गर्म मौसम होने से नगर पंचायत का पानी भी कुछ समय में ही गर्म हो जाता है। गर्मी में राहत पाने के लिए ठंडे पानी की जरूरत लोगों को अधिक हो जाती है। सभी के यहां फ्रीज की सुविधा न होने का फायदा उठाकर पानी सप्लाई का वादा कर आरओ प्लांट संचालक लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। गत तीन साल में आरओ पानी उपलब्ध कराने का कारोबार तेजी से फूल फूल र हा है। सबसे मजे की बात यह है कि तीन साल से आरओ प्लांट स्थापित कर चला रहे संचालक आज तक प्रशासनिक स्तर से इसका लाइसेंस तक नहीं बनवाए हैं, जिससे भविष्य में किसी के साथ अनहोनी होने की स्थिति में वह अपनी दूकान बंद कर खिसक सकते हैं। औषधीय खाद्य विभाग की ओर से पानी के सैंपल जांच में फेल हो चुका है लेकिन पानी का कारोबार बंद नहीं हुआ। आंकड़ो पर गौर किया जाए तो ज्ञानपुर में तीन, भदोही में चार, गोपीगंज में चार, सुरियावां में एक प्लांट स्थापित है। विभागीय सूत्रों की माने तो खाद्य औषधीय एवं प्रशासन विभाग की मिलीभगत से सभी प्लांट धड़ल्ले से चल रहे हैं।
इनसेट
आरओ प्लांट संचालकों को नोटिस भेजा गया है। नोटिस का जवाब मिलने के बाद विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि पानी के दो सैंपल जांच में फेल हो चुके हैं।
मंजुला सिंह जिला अभिहित अधिकारी