ज्ञानपुर/चौरी। रोजी रोटी के सिलसिले में महानगरों की ओर रुख करने वाले श्रमिक महामारी के इस दौर में वापस घर लौट रहे हैं। इन श्रमिकों की रेलवे स्टेशन पर बस स्टैंड पर जांच नहीं हो रही है। इससे कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा बढ़ता जा रहा है। मुंबई, दिल्ली, लखनऊ, गुजरात, कोलकाता आदि स्थाों से लौटे प्रवासी खुलेआम विचरण कर रहे हैं और चाय-पान, मिठाई, चाउमीन-फुल्की आदि दुकानों पर पहुंच रहे हैं। कोई विरोध करता है तो प्रवासी विवाद पर उतारू हो जाते हैं।
चौरी क्षेत्र के जगरनाथपुर, कोल्हड़, बरवां, रोटहां, पल्हैया, अमवां समेत कई गांवों के लोगों ने ब्लाक, तहसील, सीएचसी, पीएचसी पर तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। कहा कि जिले से लेकर ब्लाक तक कोविड-19 हेल्प डेस्क का गठन कर हेल्प लाइन नंबर भी जारी किया गया है। किसी के सूचना देने के बाद भी कोई पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटाता। यही कारण है कि जिले में संक्रमण से बढ़ी रही मौतों की संख्या जिला प्रशासन के पास नहीं रहती और सिर्फ जांच की लिस्ट लंबी रहती है। महानगरों से आने वाली डाउन व स्पेशल ट्रेनें उत्तर रेलवे के प्रतागढ़-वाराणसी व मडुआडीह-प्रयागराज रूट के विभिन्न स्टेशनों पर ठहराव लेकर आगे बढ़ती हैं। स्टेशनों के मुख्य गेट को छोड़कर जांच टीम आउटडोर के प्लेटफार्मों की ओर नजर नहीं रखती। ट्रेनों से उतरने के बाद प्रवासी आटोरिक्शा, बोलेरो, जीप, लग्जरी कार, बस पर सवार होकर कब घर पहुंच जाएंगे कोई समझ नहीं पाता। सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्र के लोग प्रवासियों की चहलकदमी से त्रस्त हैं। ग्रामीणों ने प्रवासियों को चिह्नित कर कोरोना जांच कराने की मांग उठाई है।