पूर्व विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी ने गुरुवार को बसपा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रदेश नेतृत्व को भेज दिया। इसकी जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि बसपा अब चिटफंड पार्टी बन चुकी है। कांशीराम के जाते ही पार्टी की नीतियां बदल गईं और दलितों की पार्टी अब दौलत की पार्टी हो चुकी है।
पटेल नगर स्थित अपने आवास पर प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि बसपा में अब सिर्फ दौलत की पूछ रह गई है। जिन लोगों ने पार्टी को खड़ा किया है, उन्हें ठेंगा दिखाया जा रहा है। कहा कि 2012 से 2015 तक उन्हें भदोही विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया था।
तीन साल से अधिक समय तक मैंने कड़ी मेहनत कर यहां जमीन तैयार कर ली तो यहां से हटाकर अक्टूबर 2015 में जौनपुर के बदलापुर का प्रभारी बना दिया गया। यहां भी करीब छह महीने तक मेहनत मैंने कड़ी मेहनत की, लेकिन यहां से भी हटाकर चार जून 2016 को मड़ियाहूं का प्रभारी बना दिया गया। इतना ही नहीं, 24 घंटे बाद ही मड़ियाहूं से भी हटा दिया गया। बसपा सुप्रीमो मायावती पर हमला बोलते हुए कहा कि दलितों और पिछड़ों से अब उनका कोई रिश्ता नहीं है। वह सिर्फ पैसा देख रही हैं। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं से वार्ता के बाद किसी पार्टी में जाने पर विचार करेंगे।
बता दें कि 2005 में बहुजन समाज पार्ट की सदस्यता ग्रहण करने वाले रवींद्रनाथ त्रिपाठी 2007 में जौनपुर के बरसठी से विधायक बने थे। विधायक के साथ एक ब्लॉक प्रमुख, आठ जिला पंचायत सदस्य समेत ग्राम प्रधानों ने भी बसपा छोड़ी है।