धरना कार्यक्रम के पहले दिन संगठन की ओर से प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।
आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने फर्जी मुकदमो और लाठीचार्ज के मामलों की जांच कराने का आश्वासन दिया था। लेकिन अपने वादे से मुकर कर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय को गिरफ्तार करवा लिया।
वक्ताओं ने कहा कि निषाद समाज को आरक्षण के लिए मुलायम सिंह यादव ने सत्ता में आने से पूर्व घोषणा पत्र में लिखित वादा किया था। लेकिन आने के बाद भूल गए, जबकि निषादों से वादाखिलाफी पर कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई।
भाजपा को बिहार में निषादों ने हरा दिया। ऐसे राजनीतिक दल सरकार बनाने के लिए आरक्षण का वादा तो करते हैं पर सत्ता में आने के बाद वे इसे नकार देते हैं।
कहा कि 27 फीसदी आरक्षण पर केवल मुलायम के समर्थक और 23 फीसदी आरक्षण पर सिर्फ मायावती के समर्थक काबिज हैं। दोनों भाई- बहन मिलकर देश को आजाद कराने वाले परिवारों को सड़क पर भूखे मरने के लिए छोड़ दिए हैं।
धरने में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष को रिहा करने समेत दस सूत्री मांगो को लेकर आंदोलन कर्ताओं ने मांग तत्काल पूरा करने की मांग की है।
इस मौके पर मिठाई लाल केवट, मनोज कुमार, शिवचरण, शशि प्रकाश, दुर्गा चरण, सुरेश केवट, सुशील निषाद, नंद लाल केवट, गिरजाशंकर केवट आदि रहे।