ज्ञानपुर (भदोही)। भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजे गए पूर्व एआरटीओ आरएस यादव के कालीन नगरी मेें किए गए काले कारनामों की परतें खुलने लगी हैं। फर्जी आईडी के जरिये सीखापुर गांव निवासी एक व्यक्ति के नाम से ट्रक निकालने के मामले में कोर्ट के आदेश पर आरएस यादव के खिलाफ 2011 में गोपीगंज थाने में जालसाजी का केस दर्ज किया गया था। बाद में कार्यालय से उक्त मामले की फाइल ही गायब हो गई।
वर्ष 2009 में एआरटीओ कार्यालय ज्ञानपुर के अभिलेखों में यूपी 66 ई 9295 नंबर के ट्रक का रजिस्ट्रेशन गोपीगंज थानाक्षेत्र के सीखापुर गांव निवासी सुभाष चंद्र पांडेय के नाम से कराया गया। सुभाष को इसका पता तब चला जब ट्रक के बकाया टैक्स की वसूली के लिए ज्ञानपुर तहसील के कर्मचारी उसके घर पर पहुंचे। सुभाष कहते रहे कि ट्रक मेरा नहीं है, न ही मैंने इसे कभी खरीदा है, लेकिन उनकी एक न सुनी गई। उसके बाद उन्हें जेल में डाल दिया गया। मामला कोर्ट में पहुंचा पर एआरटीओ कार्यालय से संबंधित पत्रावली न्यायालय में पेश नहीं की गई और रिपोर्ट दी गई कि कार्यालय बदलते समय पत्रावली गुम हो गई है। मामले में दो साल की दौड़धूप के बाद 2011 में तत्कालीन मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने आरएस यादव को आईपीसी की धारा 419, 420, 465, 467, 468, 471 और 347 के तहत मुकदमा दर्ज कर तलब करने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर आरएस यादव के खिलाफ गोपीगंज थाने में जालसाजी का केस तो दर्ज किया गया लेकिन कोर्ट में वह हाजिर नहीं हुए।
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