हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है। जिले में मुहर्रम पर गुरु परंपरा के पालन का सौंदर्य भी दिखता है।
गुरू के द्वारा शुरू की गई परंपरा को घोसिया की रीना किन्नर वर्षों से निभा रही हैं। वहीं कौईरौना निवासी संजय सिंह अपने हाथों से ताजिया बनाकर स्थापित करते रहे हैं। कोईरौना निवासी संजय सिंह बताते हैं कि उनके पिता ने मनौती पूरी होने पर 1974 से ताजिया बैठाना शुरू किया था। पिता के बाद वे इस परंपरा से निभाते आते रह रहे हैं। खास बात है कि इनकी ताजिया जुलूस में दोनों समुदायों के लोग बिना किसी भेदभाव के शरीक होते हैं। संजय सिंह खुद ताजिया की नक्काशी, रंग-रोगन और सजावट करते हैं। उनका कहना है कि यह परंपरा न सिर्फ एक धार्मिक आस्था है, बल्कि हमारी साझा संस्कृति की पहचान है।
इसी तरह घोसिया में रीना किन्नर सालों से गुरू परंपरा का पालन करती आ रही हैं। बताया कि उनके गुरु मां ने अपने गुरू मां की परंपरा को आगे बढ़ाया था, अब वे इसी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। बताया कि सभी कीन्नर ने अपनी गुरु मां के साथ ताजिया बनाने में सहयोग करते हैं। हर साल 10 से 15 किन्नर इस कार्य को करती हैं। बताया कि वे अपनी गुरु मां की परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। आगे उनके शिष्य भी इस परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। रीना किन्नर का ताजिया पूरे जुलूस में आकर्षण का केन्द्र होता है।