ज्ञानपुर। हजरज इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजिया निकालकर मुस्लिम समुदाय अपने दुःख और शोक को व्यक्त करते हैं। इस परंपरा का जिले में हिंदू परिवार के साथ किन्नर समुदाय भी शामिल होते हैं, जो ताजिया बनाकर के इस मातम में सहभागी बनते हैं। घोसिया की रीना किन्नर और कोइरौना कोटिया निवासी संजय सिंह चार पीढि़यों ने ताजिया बैठाकर इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनते हैं।
घोसिया निवासी रीना किन्नर बताती हैं कि 40 साल से इस चौक पर किन्नरों द्वारा ताजिया बैठाया जाता है। सबसे पहले इसकी शुरुआत उनकी गुरू मां हाजी गुलबदन किन्नर ने किया था। उसके बाद हर साल किन्नर समुदाय ताजिया उठाता है। इसी तरह संजय सिंह ने बताया कि मेरे पुरखों ने जो ज़िम्मेदारियां दी है। उसका निर्वहन किया जा रहा है। यहां न धर्म से मतलब है न समुदाय से बल्कि कर्म महान है। प्रत्येक बनने वाले ताजिया में आने वाला खर्च का भार अपने दम पर निर्वहन करते हैं। बताया कि इस कार्य के साथ अगल-बगल बन रहे ताजिया में भी बढ़-चढ़कर अपना सहयोग करते हैं।
रीना किन्नर ने बताया कि 40 साल पहले जब उनकी गुरू मां ने ताजिया बैठाना शुरू किया था तो उस समय सभी किन्नरों ने अपनी गुरू मां के साथ ताजिया बनाने में सहयोग किया था। हर साल 10 से 15 किन्नर इस कार्य को करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करके वे अपनी गुरू मां की परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। आने वाले किन्नर भी इस परंपरा को बढ़ाएंगे।
संजय सिंह ने बताया कि 30 साल पहले उनके दादा ने यह परंपरा शुरू की थी। उनका परिवार पीढ़ियों से हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजिया बनाता आ रहा है। संजय सिंह ने बताया कि दादा ने मन्नत ली थी कि परिवार में बेटे का जन्म होगा तो वे ताजिया बनाकर रखेंगे। मन्नत के बाद से ही परिवार में यह परंपरा कायम है। परिवार का हर सदस्य इसमें बखूबी भाग लेता हैं।