राज्य महिला आयोग की सदस्य उषा रानी की अध्यक्षता में बुधवार को तहसील सभागार में मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना जागरूकता शिविर एवं जन सुनवाई का आयोजन किया गया। इस दौरान महिला आयोग की सदस्य उषा रानी ने अफसरों को सख्त निर्देश दिया कि महिलाओं से जुड़ी सभी शिकायतों का तत्काल निस्तारण किया जाए। इस दौरान उनके पास जन सुनवाई में महिला उत्पीड़न से जुड़े कुल 27 शिकायती प्रार्थना पत्र आए। हालांकि इनमें से मौके पर केवल छह का ही निस्तारण हो सका जबकि शेष को संबंधित विभागीय अधिकारियों को सौंप दिया गया। उन्होंने महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए अधिकारियों से बातचीत भी की। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्राधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, महिला थाना प्रभारी, महिला हेल्पलाइन प्रभारी को निर्देश दिया कि महिलाओं के प्रकरण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कहा कि जन सुनवाई में एक महिला ने शिकायती प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। जिसे गंभीरता से लेकर महिला हेल्पलाइन की मदद लेकर मौके पर निस्तारण किया गया। महिलाओं से जुड़े कुल 27 शिकायतें आई, जिसमें छह मामलों का समझौता कराया गया। 21 मामलों को पुलिस और राजस्व विभाग को दिया गया। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना जागरूकता शिविर में आयोग की सदस्य ने कोविड से प्रभावित परिवारों को पेंशन, आयुष्मान कार्ड, कन्या सुमंगला योजना का लाभ देने के लिए कहा। योजना में कुल 13 परिवार के अभिभावकों को प्रमाणपत्र दिया गया। कहा कि अनाथ बालिकाओं के विवाह के लिए सरकार एक लाख की आर्थिक मदद देगी। इस अवसर पर अपर उप जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश यादव, सीओ अशोक सिंह, अजय कुमार सहित कई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।