स्वास्थ्य महकमे में शहरी आशाओं की नियुक्ति में कथित धांधली को लेकर फाइलों की जांच दोबारा शुरू हो गई है। डीएम के सख्त रुख के बाद बंद पड़ी फाइल को विभाग की ओर से दुबारा जांच के लिए खोल दी गई है। एसीएमओ डॉ.एसएम सहाय ने जांच शुरू की तो चयन में धांधली करने वालों की धुकधुकी बढ़ गई।
स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए आशा बहनों की नियुक्ति की जाती है। पिछले साल स्वास्थ्य विभाग की ओर से शहरी क्षेत्र में आशाओं की नियुक्ति की गई थी। छह माह पूर्व धांधली की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की, लेकिन ढाक के तीन पात वाली कहावत यहां भी चरितार्थ हुई। आधी अधूरी जांच के बाद फाइल को बंद कर दिया गया।
नियुक्ति में कई ऐसे अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया, जो कि निर्धारित पात्रता की शर्त से बाहर थे। पात्रता का दावा करने वाले वंचित अभ्यर्थियों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की। डीएम के निर्देश पर एसीएमओ ने चयनित आशाओं की फाइल फिर से खंगालना शुरू कर दिया। इसमें भी कई ऐसे आवेदन मिले जिसमें गांव या वार्ड की तरफ से चयन के लिए प्रस्ताव ही नहीं है। खास बात कि धांधली में शामिल विभागीय लोग मामले को दबाने में लगे हैं, हालांकि डीएम के सख्त रूख से मनमानी करने वालों का बचना मुश्किल होगा। सीएमओ डॉ. सतीश सिंह ने कहा कि आशाओं से विभागीय कार्य लेना हैं। जिन पर गड़बड़ी की आशंका है उनसे काम नहीं लिया जा रहा है। प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है।