ज्ञानपुर। भदोही ब्लॉक के घसकरी गांव में नौ लाख 40 हजार रुपये के घोटाले में ग्राम प्रधान मनीष यादव का वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज हो चुका है। शिकायतकर्ता कमलाकांत दूबे की हत्या के आरोप में वह जेल भी जा चुका है। घोटाले में शामिल दो ग्राम विकास अधिकारियों को प्रशासन ने रिकवरी का नोटिस भेजकर इतिश्री कर ली है। अब तक ठोस कार्रवाई न होने से तमाम सवाल उठने शुरू हो गए हैं। घसकरी गांव निवासी कमलाकांत दूबे ने कुछ माह पूर्व गांव के विकास कार्यों में धांधली का आरोप लगाते हुए डीएम को प्रार्थना पत्र दिया था। इसके बाद डीपीआरओ संजय कुमार मिश्रा ने गांव में जांच की, जिसमें नौ लाख 40 हजार रुपये की वित्तीय गड़बड़ी सामने आई। पाया गया कि प्रधान ने अपने भाई, भतीजे और पड़ोसियों के नाम पर मनरेगा का भुगतान कर दिया है। रिश्तेदार और घर के सदस्यों के नाम बनी फर्म को भुगतान किया गया। जांच में फर्म को अनियमित तरीके से चार लाख 93 हजार 544 रुपये दिए गए। इसके अलावा मनरेगा मजदूरी में तीन लाख 14 हजार 744 रुपये समेत कुल नौ लाख 40 हजार 703 रुपये का गबन पाया गया। नवंबर में ग्राम प्रधान और दो वीडीओ को रिकवरी का नोटिस जारी किया गया। सही जवाब न मिलने पर जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए। इसी दौरान गत बुधवार को शिकायतकर्ता कमलाकांत दूबे की कार से कुचलकर हत्या कर दी गई। इसमें ग्राम प्रधान समेत चार आरोपी बनाए गए। प्रधान समेत दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो आरोपियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। अब तक प्रकरण में वीडीओ कौशल और पूजा के खिलाफ विभागीय स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसे लेकर तमाम सवाल उठने लगे हैं। जिला विकास अधिकारी ज्ञान प्रकाश ने बताया कि दोनों वीडीओ ने नोटिस के जवाब दिए हैं, जिसकी जांच के लिए टीम गठित की जा रही है। जल्द ही इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।