दरोपुर पुरानी मस्जिद में तरावीह मुकम्मल करने के बाद हाफिज अकरम का इस्तकबाल करते लोग
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मुक़द्दस रमजान के तेरहवें रोजे की शाम दरोपुर पुरानी मस्जिद में तरावीह खत्म हुई। इस दौरान खत्म तरावीह कराने वाले हाफिज अकरम का नमाजियों ने फूल माला पहना कर स्वागत किया। हाफिज ने लोगों से कहा कि तरावीह कुछ दिनों में पढ़ कर खत्म करने का नाम नहीं है बल्कि इसे रमजान भर पढ़ना चाहिए। इस दौरान लोगों में तबर्रु क बांटे गए। हाफिज अकरम ने कहा की माहे रमजान में नेक नियती से किया गया इरादा खाली नहीं जाता। अल्लाह इस मुबारक महीने में एक नेकी के बदले 70 गुना नेकी देता है। कहा कि हर वो शख्स जिसे अल्लाह ने दौलत से नवाजा है वह पूरी ईमानदारी से जकात निकाले। इससे इंसान का माल महफूज और पाक होता है। इमाम ने कहा कि रोजा सिर्फ भूखा रहने का नाम नहीं। रोजा हाथ, पैर, मुंह, दिल, दिमाग सब पर काबू रखने का नाम है।इस दौरान अरशद अंसारी, फैसल अंसारी, वसीम अख्तर, वजहुल कमर, बबलू अंसारी, डा. फिरोज, कलीम अशरफ, एकराम शाहिद, मुनौव्वर अली, निजामुद्दीन अली, इलियास अहमद, इसरार अहमद, मुजम्मिल अंसारी, अंसार अहमद, नसीम अंसारी, नफीस अहमद, शाहबाज, मकबूल आदि रहे।
चौरी प्रतिनिधि के अनुसार, मस्जिदों में चांद रात से शुरू तरावीह के मुकम्मल होने का सिलसिला जारी है। वेदमनपुर स्थित जामा मस्जिद में रविवार को तरावीह मुकम्मल हो गई। मस्जिद में हाफिज इमरान अहमद तरावीह पढ़ा रहे थे। खत्म तरावीह पर लोगों ने हाफिज को फूूलमालाओं से लाद दिया और उन्हें मुबारकबाद दी। खत्म तरावीह के बाद दुआ हुई और फिर मिलाद का कार्यक्रम आयोजित किया गया। हाफिज इमरान ने लोेगों को आगाह किया कि तरावीह मुकम्मल होने के बाद रोजेदार गफलत में न पड़ें, बल्कि वे रमजानभर सूरह तरावीह अदा करते रहें। तभी उन को रोजा रखने और मुकद्दस रमजान माह का पूरा फायदा मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को रोजे में अल्लाह की ओर से मिल रही नेमतों का फायदा उठाने में पीछे नहीं रहना चाहिए। क्योंकि 11 माह तक इबादत करने पर एक माह के इबादत की बराबरी नहीं की जा सकती है। इसके अलावा रोजा सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। इस मौके पर इरफान मंसूरी, रूस्तम अली, अहमद मंसूरी, नौसाद अली, मोहम्मद शफीक, नसरूद्दीन मोहम्मद आरिफ, कलियर मंसूरी, रमजान अली आदि रोजेदार मौजूद रहे।