डीघ ब्लाक के एक ग्राम पंचायत में अधूरा पड़े प्रधानमंत्री आवास। संवाद
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ज्ञानपुर/वहिदानगर। प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) का पैसा खर्च करने के बाद भी पूर्ण न होने पर डीघ ब्लॉक प्रशासन सख्त हो गया है। ऐसे 35 आवास लाभार्थियों के खिलाफ आरसी नोटिस जारी कर 42 लाख जमा करने का निर्देश दिया। धांधली और गड़बड़ी के चलते 2022-23 में लाभार्थी न आवेदन कर पा रहे हैं न ब्लॉक प्रशासन को आवास का लक्ष्य मिला। खंड विकास अधिकारी सुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास के लिए कुल 2355 लाभार्थियों का चयन हुआ था। प्रत्येक आवास की लागत 1.20 लाख की दर से तीन किश्तों में धनराशि भी लाभार्थियों ने खाते में भेजी गई। बावजूद इसके दो वर्ष बीतने पर 103 आवास अपूर्ण मिले। तीन माह पूर्व नोटिस देकर निर्माण कार्य शुरू करने और अधूरे को पूरा कराने का निर्देश दिया गया था। इनमें से अभी तक 65 लाभार्थियों ने कार्रवाई, रिकवरी के भय से आवास का निर्माण और अधूरे कार्य को पूरा करने में तेजी दिखाई है लेकिन 35 लाभार्थियों ने नोटिस का जवाब न देकर कार्य भी शुरू नहीं कराया है। ऐसे लाभार्थियों के दर-पते पर रिकवरी की नोटिस जारी कर सदर तहसील प्रशासन को सूची उपलब्ध करा दी गई है। डीघ ब्लॉक में लगभग 100 से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। रोजगार सेवकों ने कूटरचित कर पात्रों को अपात्र और ग्राम पंचायत सदस्य के परिजनों को लाभ दिलाने में कमी नहीं छोड़ी। यहां तक कि एक ही परिवार में पिता के साथ चार पुत्रों के नाम आवास का आवंटन किया गया। जबकि दर्जनों की संख्या में पात्र लाभार्थी अभी तक ब्लाक का चक्कर काट रहे हैं। सुधवै निवासी पूजा देवी ने कहा कि आवास आवंटन में भ्रष्टाचार के कारण वह दो वर्ष से परेशान है। कई बार हुई शिकायत का कोई असर नहीं है। खंड विकास अधिकारी सुरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि शासन की ओर से जारी गाइड लाइन का उल्लंघन करने वाले रिकवरी के दायरे में आएंगे। कोई ग्राम पंचायत सदस्य के पात्र होने पर लाभ लि या जा सकता है जिले में वित्तीय वर्ष 2016-17 से अब तक करीब 25 हजार आवास निर्माण का लक्ष्य तय किया गया। खास बात तो यह है कि 2016-17 व 2017-18 में स्वीकृत आवास के निर्माण अभी तक पूरे नहीं हो सके। वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2021-22 में नौ हजार से अधिक आवासों का आवंटन हुआ है। सभी तीनों किश्त लाभार्थियों के खाते में भेजे जा चुके हैं। हकीकत यह है कि कहीं पर अभी तक छत तक नहीं पड़ी हैं तो 20 फीसद आवासों का प्लास्टर और पोताई नहीं हो सकी है। इससे पक्के घर में सपना संजोकर आवास पाने वाले लाभार्थियों को अब भी छप्पर और टीनशेड में रात गुजारनी पड़ रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 200 से अधिक आवास शत-प्रतिशत पूर्ण नहीं है। भदोही ब्लॉक के चकभूईधर गांव में तीन साल पूर्व आवास स्वीकृत हुए। लाभार्थी राजेंद्र , शारदा, शिव और रवि का आवास अभी भी अधूरा है। तिरपाल आदि लगाकर रहते हैं। उनका कहना है कि ठंड और बारिश में दिक्कत हाती है।