विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद अब जीत-हार को लेकर मंथन का दौर शुरू हो गया है। चुनाव में दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी और उनके समर्थक हार के कारण तलाश करने में जुट गए हैं। चुनाव में हार का सामना करने वाले कुछ प्रत्याशियों का कहना है कि उन्हें कुछ जगहों पर अपनों ने ही धोखा दिया। कहीं अपनों से विश्वासघात मिला तो कहीं जयचंदों ने हरा दिया।
भदोही विधानसभा से वर्ष 2017 के चुनाव में जीते रवींद्र नाथ त्रिपाठी इस बार अपनी सीट बचाने में असफल रहे। उनका कहना था कि जनता ने उन्हें जिताया, लेकिन जयचंदों के कारण हार मिली। वर्ष 2017 के चुनाव से 18 हजार अधिक मत मिले। चुनाव की व्यस्तता के कारण कुछ लोगों की गलती को देख नहीं सके। जनता भ्रमित हो गई, लेकिन अब पछता रहे हैं। कुछ लोगों को मेरी लोकप्रियता नहीं पची और वही लोग भितरघात कर गए। समाज के हर तबके ने उन्हें वोट दिया है, इसके लिए वे आभारी हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष में क्या होता है, यह सब जानते हैं। कहा कि जो वादे जनता से किए हैं उसे पूरा करेंगे। इस बार भले ही नहीं जीते हैं, लेकिन जनता की आवाज उठाकर समस्याओं का समाधान कराने के लिए के लिए तत्पर रहेंगे। उन्होंनेे कहा कि सुरियावां और कंधिया में ओवरब्रिज का निर्माण कराएंगे। भदोही- जौनपुर, मछलीशहर तक फोरलेन निर्माण को जल्द शुरू कराने के लिए भी शासन स्तर तक जाएंगे। ज्ञानपुर से चार बार विधायक रहे विजय मिश्र की हार से उनकी पत्नी एमएलसी रामलली मिश्र काफी आहत हैं। उन्होंने कहा कि दो दशक से विधायक अपना घर तक नहीं बना पाए। जनता की सेवा में लगे हमेशा रहे। ऐसे लोगों ने विश्वासघात किया, जिनसे उम्मीद नहीं थी। उनकी बेटी रीमा पांडेय ने कहा कि जनता का निर्णय शिरोधार्य है। अब पांच साल जनता नए विधायक को भी देख ले। औराई की सपा प्रत्याशी अंजनी सरोज ने हार का ठीकरा प्रशासन पर फोड़ा। मतगणना में धांधली का आरोप भी लगाया।