सीतामढ़ी। भगवान श्री राम एवं जगत जननी माता सीता के सुपुत्रों लवकुश कुमारों के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में सीतामढ़ी में चल रहे नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान सोमवार को संपन्न होंगे। इसी के साथ नवमी मेले यानी रामायण मेले का आयोजन होगा, जो मंगलवार तक चलेगा। मेले की तैयारी हो चुकी है।
मान्यता है कि लवकुश कुमारों का जन्म आषाढ़ शुक्ल पक्ष नवमी तिथि को महर्षि वाल्मीकि आश्रम सीतामढ़ी में हुआ था। मुख्य धार्मिक कार्यक्रम और श्रीराम कथा का आयोजन महर्षि वाल्मीकि आश्रम और श्री सीता धाम मौनी बाबा आश्रम में चल रहा है।
सोमवार के मेले में भारी भीड़ होने का अनुमान है। इसे देखते हुए सुरक्षा के बंदोबस्त किए हैं। पुलिस बलों के साथ महिला पुलिस, जल पुलिस, पीएसी के जवान इंस्पेक्टर और दरोगा की ड्यूटी लगाई गई है। गंगा में नौकाओं के संचालक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मेले में दुकानें, झूले और सर्कस सज गए हैं।
-
सुबह से शुरू हो जाएगा दर्शन-पूजन का सिलसिला
सीतामढ़ी। तड़के सुबह से ही गंगा स्नान शुरू हो जाएगा। साथ ही लवकुश कुमारों और माता सीता जी के साथ श्री राम दरबार, विश्व प्रसिद्ध श्री हनुमान जी मंदिर, श्री सीता समाहित स्थल मंदिर, प्राचीन सीता मंदिर, सीता धाम मौनी बाबा आश्रम, उड़िया बाबा आश्रम एवं बाबा धवासा नाथ आश्रम में सुबह से शाम तक दर्शन पूजन का सिलसिला चलेगा।
-
मेले में होती है इंद्रदेव की उपस्थिति
सीतामढ़ी। नवमी मेले में सीतामढ़ी में इंद्रदेव भी उपस्थित दर्ज कराते हैं। लोगों का मानना है कि नवमी मेले के दिन सीतामढ़ी में बारिश अवश्य होती है। इसी तरह महिलाएं अपने अमर सुहाग के लिए सीता केश वाटिका का शृंगार कर दर्शन पूजन करती हैं। गंगा तट पर विद्यमान त्रेतायुगीन वटवृक्ष (सीतावट) महावृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है।