महराजगंज। सभी को पक्का छत मुहैया कराने की सरकारी मुहिम कालीन नगरी में फेल हो गई है। औराई ब्लॉक के कंसापुर की वनवासी बस्ती में साल 1995 में 31 परिवारों को इंदिरा आवास मिला। आधे-अधूरे बने आवास अब जर्जर हो चुके हैं। तिरपाल डालकर सभी गुजर-बसर कर रहे हैं। छत की दरारों से बारिश की टपकती बूंदे रात में लोगों को डराती हैं। जिसको लेकर बस्ती के लोग परेशान हैं। जनपद सृजन के बाद तत्कालीन डीएम बाबूराम ने 1995 में कंसापुर के 31 वनवासी परिवारों को इंदिरा आवास स्वीकृत किया। ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की उदासीनता से आधा अधूरा आवास बनाया गया। भवन तो बन गए, लेकिन प्लास्टर आदि नहीं हो पाए। धीरे-धीरे तीन दशक का समय बीत गया। अब आवास की दीवारों में दरार आ गई हैं। छत से पानी टपकता है। आंधी, पानी में कोई हादसा न हो जाए, इसलिए बस्ती वासी मिट्टी के कच्चे मकान बना कर पन्नी, पुराने कपड़े आदि की छत बनाकर उसके नीचे जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। बस्ती की सुगना देवी, दुर्गावती, राखी, भगवानी ने बताया कि 30 साल पहले आवास का बजट कम था। कमीशन आदि के कारण सही ढंग से नहीं बना। एक से दो बारिश में ही छत टपकने लगी। अब आवास जर्जर हो गए हैं। कहीं दीवार न गिर जाए इसलिए कच्चे मकान में रहते हैं। भारती, कन्हैया, शारदा, मोना, प्रमिला, सुबेधा, सुनीता, राधा ने कहा कि आवास की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक नहीं मिल सका है। ग्राम प्रधान शिव शंकर जायसवाल ने बताया कि 31 परिवारों को आवास दिलाने के लिए आवेदन दिया गया है। जल्द ही सभी को प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हो जाएगा। औराई बीडीओ दिलीप कुमार ने कहा कि जल्द ही बस्ती में जाकर सत्यापन किया जाएगा। जरुरतमंदों को आवास दिलाने के लिए पत्र लिखा जाएगा।