ज्ञानपुर। तकरीबन डेढ़ महीने के सूखे के बाद हफ्तेभर पूर्व शुरू हुईं इंद्रदेव की मेहरबानियों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगभग हर रोज बारिश से फसलों को भले ही फायदा हो रहा है, लेकिन नगरीय जनमानस की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। बृहस्पतिवार को आठ घंटे तक लगातार बारिश से दैनिक जीवनचर्या के कार्य भी प्रभावित हो गए। निचले इलाके में जलभराव, सड़कों पर कीचड़ का साम्राज्य फैल गया और छोटे दुकानदारों की दुकानदारी ठप पड़ गई।
भदोही जिले में बृहस्पतिवार को 27 मिमी. बारिश हुई। बुधवार की रात दो बजे के आसपास शुरू हुई बारिश का सिलसिला दिन के 10 बजे तक लगातार जारी रहा। इस दौरान कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश होती रही, लेकिन बारिश थमी नहीं। बारिश के साथ हवाएं भी चल रहीं थीं। इससे घरों में सोए लोगों को चादर का सहारा लेना पड़ा। दिन के 10 बजे के बाद रुक-रुक कर बारिश होने लगी। कभी कम तो कभी ज्यादा। बीच-बीच में हवा के झोंकों के साथ आने वाले बादल जब-तब पानी बरसाते रहे। पूरे दिन आसमान साफ नहीं हुआ। काली-कजरारी घटाएं घिरे रहने से रात में भी बारिश की संभावना से इनकार नहीं किया गया। इससे नगरीय इलाके में मुश्किलें बढ़ गईं। पुरानी कलेक्ट्रेट रोड, पटेल नगर, पुरानी देहाती रोड और अन्य सड़कों पर जहां जलभराव हो गया, वहीं जर्जर सड़कों पर जगह-जगह जमा पानी आने-जाने वालों के लिए मुसीबत बना रहा। सब्जीमंडी के पीछे कच्ची सड़क कीचड़ से सन गई। कई बाइक और साइकल सवार गिरते नजर आए। सड़कों पर जगह-जगह जमा हुए पानी में से होकर गुजरने वाले वाहन आसपास से होकर जाने वाले लोगों की पोशाक बिगाड़ते रहे। इससे सबसे ज्यादा परेशानी सुबह स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को हुई। कुछ भींगते हुए स्कूल गए तो कुछ को छाते का सहारा लेना पड़ा। शाम को छह बजे आधे घंटे और सात बजे फिर आधे घंटे की बारिश हुई।
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897.5 मिमी. बारिश फिर भी कम
ज्ञानपुर। इस सीजन में जिले में 897.5 मिमी. बारिश हुई। हालांकि यह इस जरूरत के हिसाब से कम मानी जा रही है। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो बृहस्पतिवार को लगभग 27 मिमी. बारिश हुई और मौजूदा सीजन में 25 सितंबर तक 897.5 मिमी बारिश हो चुकी है। हालांकि अब तक एक हजार मिमी बारिश होनी चाहिए थी। लगभग सौ मिमी बारिश अभी कम है। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि सितंबर में यह कमी भी पूरी हो सकती है।
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धान के लिए अमृत, उर्द को खतरा
ज्ञानपुर। हफ्तेभर से लगातार जारी बारिश के क्रम से धान की फसल के लिए अमृत की बरसात हो रही है, लेकिन अन्य दलहनी फसलों के लिए यह खतरा भी है। गंगा के तटवर्ती इलाके में लगी धान, अरहर, बाजरा और अन्य फसलों को बाढ़ ने बर्बाद किया तो मैदानी इलाके में बारिश ने दलहनी और तिलहन की फसल पर प्रहार कर दिया है। इससे उत्पादन पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। कृषि उप निदेशक डॉ. अरविंद सिंह ने कहा कि हफ्तेभर से हो रही बारिश ने पिछले डेढ़ महीने के सूखे को कवर किया है। धान समेत अन्य तमाम फसलों में जान आ जाएगी। जिन किसानों की उर्द पक चली है, उन्हें उखाड़ लेना चाहिए। उर्द की फसल के लिए यह बारिश खतरा है। इसमें फलियां खराब हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह बारिश आने वाली रबी की फसल के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इसकी नमी से रबी की फसल के लिए खेतों में जान बनी रहेगी।