ज्ञानपुर। खाड़ी देशों की ओर से उठे चक्रवाती तूफान ताउते का असर जिले में दूसरे दिन भी बदस्तूर जारी रहा। इस क्रम में बृहस्पतिवार की सुबह से ही न तो आसमान से बादल छट सके और न ही धूप निकल सकी। ऐसे में पूरे दिन बूंदाबांदी चलने से नगरों व गलियों की बजबजाती गंदगी, जाम पड़े नाला-नाली, कीचड़ से सनी सड़कों से जनमानस को राहत नहीं मिल सकी।
दरअसल बीते सोमवार की देर रात ताउते तूफान का असर जिले में प्रभावी होने से हुई झमाझम बारिश ने अपना विकराल रुप दिखाया। इस दौरान हवाओं का रुख तेज होने के साथ ही बारिश के बीच हुई शार्टसर्किट से बिजली गुल हो गई जिसमें अभी तक लगभग दो सौ गांवों की बिजली बहाल नहीं हो सकी है। वहीं खेती के लिहाज से रवि सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की कटाई-मड़ाई से मुक्ति पा चुके किसानों को नुकसान का कोई भय नहीं रहां। हालांकि कई आम परिवारों में रिहायशी छप्पर, खपरैलयुक्त घरों के रिसने, उड़ने से बौखलाहट बनी रही। पूर्वोत्तर रेलवे, एनएचएआई समेत विभिन्न बड़ी परियोजनाओं के ठप रहने से कार्यदायी संस्थाओं में कार्य के विलंब होने का मलाल सताता रहा। जर्जर हो चुके बिजली उपकेंद्रों में पानी भरने के चलते अधिकारियों-कर्मचारियों में ब्लास्टिंग की चिंता दूर नहीं हुई। गोपीगंज नगर, जंगीगंज, कोइरौना, सोनपुर-कटरा, धनतुलसी, छेछुआं, इटहरा, बारीपुर, कलिंजरा, गोपालापुर, दानीपट्टी, चौरी, दुर्गागंज, लालानगर, माधोसिंह, घोसिया, खमरिया नगर, उगापुर, कठारी, नईबाजार, सरोई, पाली, सुरियावां, दानूपुर, अभोली, मतेथू, सुभाषनगर, कुरमैचा, ऊंज, नवधन, सुधवैं, मैलौना, गोधना, दरवांसी, चंदापुर, सीतामढ़ी, कालिकानगर, मऊरामशाला, सरायहोला आदि क्षेत्रों को जोड़ने वाले छोटे-बड़े मार्गों पर जलजमाव दूर न होने से आवागमन में परेशानी उठानी पड़ी। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड को पहुंचने वाले संपर्क मार्ग की हालत बद से बदतर होने के चलते राहगीरों, वाहन चालकों ने रास्ता बदल कर यात्रा पूरी की। बावजूद इसके लोक निर्माण विभाग और जिला पंचायत की ओर से जलनिकासी की व्यवस्था कराने में कदम नहीं बढ़ाया। गांव की सरकार शपथ लेने, अधिकार मिलने का इंतजार करने में समय जाया कर रही है लेकिन पंचायती राज विभाग अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने में पसीना छोड़ रहा है। आवागमन में परेशानी उठाने वालों ने आरोप लगाया है कि पूर्व में कार्यरत रही गांव की सरकार में 80 फीसद जनहित के कार्य कागजों पर कराकर सरकारी धन का बंदरबांट होने से खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। सूफीनगर बाजार से जंगीगंज रेलवे स्टेशन मार्ग पर गटर का पानी एक-दूसरे से विवाद को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाया।