जिले में गेहूं की बोआई की तैयारी तेज हो गई है। कृषि विभाग की ओर से रबी सीजन की खेती के साथ ही गेहूं की बोआई का रकबा भी तय कर दिया गया है। 52 हजार 778 हेक्टेयर रकबे में रबी की खेती होगी।
इसमें 47 हजार 555 हेक्टेयर में अकेले गेहूं की बुवाई होगी, जबकि चार हजार हेक्टेयर में चना, मटर, मसूर और सरसों की खेती की जाएगी। गेहूं के उत्पादन का लक्ष्य 125 हजार मीट्रिक टन (एमटी) रखा गया है।
2024 के सापेक्ष इस बार करीब आठ हजार हेक्टेयर रकबा घट गया है। पिछले साल 60 हजार हेक्टेयर में रबी की खेती की गई थी। जिले में कुल दो लाख 35 हजार किसान पंजीकृत हैं। करीब 75 से 80 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है।
रबी और खरीफ सीजन में शासन स्तर से जिले स्तर पर रबी और खरीफ की खेती का रकबा तय किया जाता है। 2025 में रबी की खेती का रकबा तय हो गया है। इस साल 52 हजार 778 हेक्टेयर रकबे में रबी की खेती होनी है।
खेती का लक्ष्य पूरा हो सके, इसके लिए विभाग भी तैयारी कर चुका है। विभाग ने प्राथमिकता के तौर पर गेहूं, चना, मटर और सरसो का बीज मंगा लिया है। बीज आने पर इसे राजकीय कृषि भंडार के माध्यम से पंजीकृत किसानों को बीज का वितरण किया जाएगा।
विभाग की तरफ से सात हजार क्विंटल गेहूं का बीज मंगाया गया है। जिला कृषि अधिकारी ईरम ने बताया कि इस वर्ष किसानों में बंटने के लिए सात हजार कुंतल गेहूं का बीज आएगा। इस वर्ष करीब 48 हजार हेक्टेयर में गेहूं फसल की खेती होगी।
किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान दर यानि 4680 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों को गेहूं बीज क्रय करना होगा। जिले के छह ब्लॉकों के छह बीज गोदामों पर गेहूं बीज मिलेगा। कृषक निर्धारित मूल्य पर बीज का क्रय कर पाएंगे।
बीज क्रय के बाद अनुदान का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनका पंजीयन विभागीय पोर्टल पर हुआ है। बीज खरीदने वाले किसानों को बैंक पासबुक, आधार कार्ड एवं खेत की खतौनी साथ लाना होगा।
किस फसल की कितनी बोआई
कृषि विभाग के आंकड़े पर गौर करें तो रबी सीजन में 47 हजार 555 हेक्टेयर में गेहूं की बोआई होगी। जौ को 370 हेक्टेयर में बोया जाएगा। इसी तरह चना 500 हेक्टेयर, मटर एक हजार, मसूर 127, सरसो 2703, तोरिया 464 और अलसी 59 हेक्टेयर में बोई जाएगी।