स्थान: एसबीआई ज्ञानपुर शाखा। समय: सुबह आठ बजे। बैंको का ताला नहीं खुला था लेकिन उपभोक्ता एक-एक करके बैंक परिसर पर एकत्रित होने लगे। पांच सौ और एक हजार की बंद हो चुकी पुरानी नोट बदलने की जल्दी में ज्यादातर बैंको की कमोबेश यही स्थिति रही। एक से डेढ़ घंटे लाइन में खड़े लोगों को बैंक खुलने के बाद मामूली राहत मिली। कर्मचारियों की कमी से कुछ ग्रामीण बैंको में तेजी से काम न निपटने से कई लोग झल्ला गए, हालांकि नगरीय इलाकों की बैंकों में काउंटर बनाकर पुरानी नोट बदलकर 10 से लेकर 100 की नोट दी गई साथ ही पुरानी नोट जमा किया गया।
भारत सरकार की ओर से आठ नवंबर को 500 और एक हजार के नोट बंद होने के बाद से ही लोगों की बेचैनी बढ़ गई थी। नौ नवंबर को अवकाश होने से परेशान लोग बृहस्पतिवार सुबह होते ही बैंकों की ओर रूख करने लगे। सुबह आठ बजे से नौ बजे के बीच ज्ञानपुर के पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक, स्टेट बैंक, यूनियन बैंक समेत अन्य बैंको पर लोग पैसा जमा करने के लिए पहुंच गए।
ग्राहकों की सुविधा के लिए एसबीआई में पांच, यूबीआई में पांच, पीएनबी में दो काउंटर लगाए गए थे। इसी तरह डाकघर में पुराने नोट बदले गए। जरूरतमंद उपभोक्ताओं को आईडी लेने के बाद चार-चार हजार रुपये दिया गया। उपभोक्ताओं को 10, 20,50 और 100 की करेंसी दी गई। पांच सौ और दो हजार के नई करेंसी पाने का सपना संजोकर गए लोगों को मायूसी हाथ लगी। गोपीगंज संवाददाता के अनुसार, नोट बदलने के लिए नगर के बैंको में सुबह से ही लंबी लाइन लग गई। भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और पोस्ट ऑफिस पर लंबी कतार लगाकर लोग खड़े रहे। सुरक्षा के मद्देनजर बैंक के बाहर और अंदर सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। रिजर्व बैंक के नियमों के चलते लोगों को 10 हजार से अधिक की निकासी नहीं दी गई। इसको लेकर लोग चर्चा करते रहे। लोगों का कहना है कि जिसके यहां कार्यक्रम है उसको पर्याप्त पैसा न मिलने से परेशानी हाे रही है।