डिजाइन कार्यशाला को संबोधित करते अजित कुमार त्रिपाठी।
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केंद्र सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों के विकास के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। इसमें उत्पादों के विपणन से लेकर उत्पादों को बेहतर और गुणवत्तायुक्त बनाने के लिए कई योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता दी जा रही है। लेकिन इसकी पहली शर्त यह है कि सभी उद्यमी उद्योग आधार में पंजीकृत हों। यह बातें एमएसएमई विकास संस्थान और एकमा द्वारा कालीन भवन में आयोजित डिजाइन कार्यशाला में मंगलवार को औद्योगिक परामर्शक, अनिल कुमार त्रिपाठी ने दी। वहीं, वक्ताओं ने डिजाइन से विपणन की व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात भी कही।
कहा कि सरकार इस बात को अच्छी तरह समझती है कि 25 लाख रुपये के नीचे वाले उद्यमी नया करने में हिचकते हैं क्योंकि उनके पास पूंजी की समस्या है। इसे पूरा करने के लिए तकनीकी विकास और गुणवत्ता बेहतर करने, उत्पादों के बेहतर विपणन ढांचा तैयार करने के लिए प्रोत्साहन स्वारूप आर्थिक सहयोग दी जा रही है। कहा कि बारकोड ऐसा माध्यम है जिसमें आप अपने उत्पादों को पंजिकृत कराते ही वह आपकी हो जाती है। आयोजक एमएसएमई विकास संस्थान, नैनी के सहायक निदेशक, तरुण कुमार बुडाल और निफ्ट (नेशनल इंस्टीच्यूट आफ फैशन टेक्नालाजी) की सहायक प्रोफेसर नेहा प्रज्ञा ने प्रोजेक्टर की सहायता से लोगों को डिजाइनिंग में वर्तमान चलन से अवगत कराते हुए विपणन व्यवस्था को और बेहतर करने की सलाह दी।
उप्र निर्यात संवर्धन परिषद के उपाध्यक्ष विनय कपूर और अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के मानद सचिव ने कालीन उद्योग की बेहतरी के लिए दूसरी आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला। इस दौरान एमएसएमई नैनी के सहायक निदेशक चंद्रमल, शिवसागर तिवारी, शमीम आलम लल्लन, अश्फाक अंसारी एसी बरनवाल, हाजी जलील अंसारी, हाजी अब्दुल हादी अंसारी रहे।