ऊंज। प्रयागराज की सीमा से सटे गांवों के लोगों को इलाज कराने के लिए आसपास के शहरों नहीं जाना होना। क्षेत्र की 50 फीसदी आबादी के लिए स्वास्थ्य केंद्र खोला जाएगा। शासन ने क्षेत्र में सुविधाओं और आबादी की जानकारी मांगी है।
ऊंज क्षेत्र के करीब 20 गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं है। इन गांवों की करीब 50 हजार की आबादी के लिए हेल्थ वेलनेस सेंटर तक नहीं है। गांव के लोग बीमार पड़ने पर या तो नीम हकीम के पास जाते हैं या फिर वहां से लगभग सात से 15 किलोमीटर दूर गोपीगंज या डीघ सीएचसी पहुंचते हैं। क्षेत्र की कुरमैचा, बनकट खास, सीकी, चौरा कला, भैरवपुर, कुबी हरद्दोपट्टी, सुबरी, मुरारी, पुरेभान, मेहनतपुर, बरईपुर, बेरूआ, कुरेनगरी गांव के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं से जूझते रहते हैं। लोगों की इस समस्या को अमर उजाला ने अपने चार जनवरी के अंक में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जूझ रहे लोग शीर्षक के साथ खबर प्रकाशित की थी। शासन ने इस खबर को संज्ञान में लेकर सीएमओ डॉ. एसके चक से इसकी रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में इन गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं, जनसंख्या, उपचार के लिए लोग कहां जाते हैं आदि बिंदुओं पर जवाब मांगा है। सीएमओ डॉ. एसके चक ने डीघ सीएचसी अधीक्षक को इसकी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के आधार पर ही वहां स्वास्थ्य केंद्र खोला जाएगा।
इनसेट:
बारिश में होती है दिक्कते:
ऊंज। स्वास्थ्य केंद्र न होने से मरीजों को सबसे अधिक परेशानी बरसात और भीषण गर्मी के दिनों में होती है। गांव से सात से 15 किमी दूर वाले लोगों को तीखी धूप और बरसात में अस्पताल जाना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य केंद्र खुलवाने को लेकर कई बार मौखिक रुप से सांसद, विधायक से ग्रामीण मांग कर चुके हैं। लेकिन परिणाम सकारात्मक नहीं मिला।
अखबार की खबर को संज्ञान में लेकर शासन ने संबंधित गांवों की रिपोर्ट मांगी है। गांवों की हकीकत परख कर विभागीय अधिकारी कर्मचारी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। इसके बाद उसे शासन को भेजा जाएगा। शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। - डॉ. एसके चक, सीएमओ, भदोही