चौरी। चौरी के रोटहा निवासी श्यामधर मिश्र ने कारसेवा के दिनों के संघर्षों को याद किया। कारसेवा के दौरान का परिचय पत्र और उस समय के अखबार की प्रति को अब तक सहेज कर रखे हुए हैं। कहते हैं कि प्रभु श्रीराम सब जानते थे। आज उनकी कृपा से ही कारसेवकों का बलिदान सफल हुआ है और अयोध्या में भव्य मंदिर बन रहा है।
उन्होंने बताया कि तब वे विश्व हिदू परिषद के पूर्वी प्रखंड मंत्री हुआ करते थे। उन्हें कारसेवा के लिए वाहिनी प्रमुख की जिम्मेदारी मिली थी। उनके हस्ताक्षर से ही कारसेवकों का परिचय पत्र बनता था। बताया कि 1992 में ब्रह्ममाश्रम स्थित स्वामी विवेकानन्द इंटर कालेज में कारसेवा में जाने के लिए बैठक आयोजित की गई थी। उस समय सख्ती इतनी अधिक थी कि तमाम प्रयासों के बाद भी केवल तीन लोग ही इकठ्ठा हो सके। इसके बाद भी अपने दो साथी चंदौली निवासी विशिष्ट नारायण तिवारी और बरवा निवासी राम श्रृंगार पांडेय के साथ वे साइकिल से ही कारसेवा के लिए निकल पड़े। घर से सत्तू, चना और लाई लेकर वे सफर में निकले थे। सरयू पुल पर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
उन्होंने बताया कि कारसेवकों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि कहीं भी जेलों में जगह नहीं बची थी। पुलिस उनके साथ अन्य कारसेवकों को लेकर 36 घंटों तक बस में घूमती रही। अंत में फर्रुखाबाद के क्रिश्चियन स्कूल में 23 दिनों तक उन लोगों को रखा गया। वहां तीन दिन बाद ही खबर मिली कि कारसेवा हो चुकी है और विवादित ढांचे को ढहा दिया गया है। खबर सुनकर तो विश्वास ही नहीं हुआ। किसी तरह जेल में अखबार मंगा कर पढ़ा तो देखते ही पूरा जेल जय श्रीराम के नारे लगाने लगा। बताया कि आज रामलला विराजमान हो रहे हैं तो लग रहा है कि हमारे संघर्ष सफल हो गए। कारसेवा की कहानी बताते हुए वे भावुक भी हो गए। बताया कि रामलला के दर्शन की इच्छा है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद वहां जाएंगे।