रामपुर गंगा घाट पर हो रही साफ-सफाई। संवाद
सीतामढ़ी। पखवारे भर से चल रहा पितृपक्ष का अंतिम दिन अमावस्या तिथि रविवार को है। इस दिन पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। इससे उन्हें तृप्ति मिलती है। वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। रविवार को जिले के प्रमुख गंगा घाटों पर करीब ढाई लाख लोग पितरों को पिंडदान करेंगे। रामपुर, सीतामढ़ी, सेमराधनाथ, बिहरोजपुर, कलिंजरा, भवानीपुर आदि घाटों पर लोग अपने पितरों के लिए पिंडदान करेंगे। लेकिन, घाटों पर खास व्यवस्था नहीं की गई है। गंगा में बाढ़ की स्थिति है लेकिन जलस्तर कम हुआ है। लोग पहले क्षौर कर्म (बाल मुंडन) कराते हैं। उसके बाद गंगा स्नान कर पिंडदान करते हैं। यह संख्या इतनी अधिक होती है कि गंगा घाट पर जगह कम पड़ जाती है। इस समय गंगा का जल स्तर भी अधिक है ऐसे में गंगा तट पर जगह की कमी है। इस समय घाट की मिट्टी भी गीली है। हालांकि जल स्तर कम होने के साथ घाट पर जगह बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि गंगा तट पर काफी खाली जगह है जहां लोग क्षौरकर्म और पिंडदान कर सकेंगे। पितृ विसर्जन के दिन बड़ी संख्या में लोग गंगा तट और पक्के घाट पर बाल बनवा कर छोड़ देते हैं। हवा के माध्यम से बाल चारों ओर फैल जाता है। श्रद्धालुओं, सैलानियों और स्नानार्थियों को पक्के घाट और गंगा तट पर आना-जाना मुश्किल हो जाता है। इस समस्या से सुंदर पक्का घाट और रमणीक गंगा का पावन तट गंदगी से भर जाता है। लोगों को गंगा दर्शन, स्नान, पूजा आदि में दिक्कतें होती हैं। महर्षि वाल्मीकि आश्रम के महंत पंडित हरि प्रसाद मिश्रा, श्री सीता समाहित स्थल मंदिर के प्रबंधक कैलाश चंद, मौनी बाबा आश्रम के महंत दीनबंधु दीनानाथ, प्रधान प्रतिनिधि धर्मेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी से पक्के घाट और स्नान तट पर क्षौरकर्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।