भदोही। कोरोना संकट काल में बिजली दरें बढ़ाने की सुगबुगाहट भर से उपभोक्ता सहम गए हैं। पहले ही महंगाई से जूझ रहे आम लोग कोरोना संक्रमण काल में जेब पर एक अतिरिक्त भार वहन करने का साहस नहीं जुटा पा रहे। प्रदेश शासन को बिजली दरों के स्लैब में बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है, जो छोटे और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं को नहीं सुहा रहा। हालांकि बिजली दरों पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हो सका है, लेकिन इसका विरोध शुरू हो गया है। अब देखना है कि सरकार क्या फैसला लेती है। उधर उपभोक्ताओं का कहना है कि जहां रोजगार जा रहे हैं। लोगों की दुकानें बंद हो रही हों, ऐसे समय में बिजली दरें बढ़ाना क्या उचित होगा यह बड़ा सवाल है। लोगों ने कहा कि सरकार को सबसे निचले तबके के बारे में सोचना होगा जो मजदूरी कर किसी तरह एक बल्ब जलाकर जी रहे हैं। यदि दरें बढ़ीं तो वे खर्चे कैसे वहन कर पाएंगे। रमाशंकर सिंह, नौकरीपेशा ने कहा कि बिजली हर खास और आम के जीवन का महत्वपूर्ण अंग है। यह आवश्यक वस्तु भी है। सरकार को चाहिए कि आवश्यक वस्तुओं के दाम ऐसा रखे जिससे हर किसी का काम चल जाए। इस पर केंद्र सरकार को ध्यान देना चाहिए। सुशीला देवी, गृहणी ने कहा कि यूपी में बिजली दरें पहले से ही अधिक हैं। अब सरकार स्लैब बदल कर गरीबों पर अतिरिक्त बोझ डालना चाहती है। कोरोना काल में यदि इस बढ़ोत्तरी को सरकार टालती है तो यह अच्छा फैसला होगा। नहीं तो गरीबों पर भार बढ़ेगा। रागिनी शर्मा, गृहणी ने कहा कि सरकार को मौजूदा स्लैब न केवल बरकरार रखना चाहिए। बल्कि अति गरीबों और अति पिछड़ों के लिए अलग से स्लैब डालना चाहिए। इससे जो गरीब हैं उन्हें राहत होगी। वैसे भी कोरोना काल में सरकार लोगों को राहत देना चाहती है। आलम खां, व्यवसायी ने कहा कि जब सरकार कोरोना काल में आम जन को राहत दे रही है तो फिर बिजली महंगी करने का क्या तुक है। एक ओर क्रेडिट कार्ड धारकों को मोरेटोरियम दिया जा रहा है तो फिर फिर बिजली कीमतों के रूप में भार बढ़ाना ठीक नहीं है।