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गंदगी व दुर्गंध में जीने को मजबूर कांशीराम आवास के लोग

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जिले में बेहतर व साफ सफाई के कार्यों का दावा करने वाले जिला प्रशासन व नगर पंचायतों के अधिकारियों के दावों की पोल जमीन पर पूरी तरह से खोखली साबित हो रही है। जिला मुख्यालय से महज ढाई किलोमीटर की दूरी पर स्थित कंसापुर में विकास भवन से सटे हुए कांशीराम आवासीय योजना के फ्लैट स्थित है। मुख्यमंत्री मायावती के शासन काल में बनाए गए यह फ्लैट आर्थिक रूप से कमजोर व गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों की सहूलियत के लिए बनाए गए थें । लेकिन मौजूदा समय में इस आवासीय फ्लैटों में रह रहें लोग गंदगी व दुर्गंध युक्त नारकीय जीवन जीने की मजबूर है। कांशीराम आवासीय योजना में सबसे प्रमुख समस्या है जलभराव की जो लगभग हर साल यहां रहने वाले लोगों को झेलनी पड़ती है। परिसर में जलनिकासी की कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है। नतीजतन बारिश के मौसम में भारी बारिश होने पर अक्सर यहां पर घुटने भर पानी लग जाता है जिसमें यहां के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा यहां रहने वाले लोगों के मुताबिक बारिश के दौरान यहां पर जलजमाव से मच्छरों की संख्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है। कांशीराम आवासीय परिसर में स्थित पानी टंकी बस शोपीस बनकर रह गया है। यहां पर पेयजल आपूर्ति के लिए बनाई गई पानी टंकी से लंबे समय से जलापूर्ति बंद है। नतीजतन ऐसे में आवासीय फ्लैटों में रहने वाले सात परिवारों को हैंडपंप के सहारे ही अपनी पेयजल आपूर्ति व अन्य जलापूर्ति को पूरा करना पड़ रहा है। कांशीराम आवासीय फ्लैटों में रह रहें लोगों को एक साथ कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है । दरअसल इस फ्लैट में जिला विद्युत विभाग की ओर से पिछले छ माह से बिजली आपूर्ति रोक दी गई है । हालांकि इस संबंध में बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कांशीराम आवासीय फ्लैटों में रहने वाले लोगों बिजली बिल का भुगतान नहीं किया है। इस वजह से यहां का बिजली आपूर्ति रोक दी गई है। लेकिन इस परिसर में रहने वाले कई लोग अवैध रुप से बिजली कनेक्शन लेकर लाइट जला रहे हैं। दरअसल कांशीराम आवासीय परिसर में जलनिकासी, जलापूर्ति व साफ सफाई सहित अन्य रखरखाव के कार्यों को कराने की जिम्मेदारी नगर पंचायत ज्ञानपुर की है । लेकिन यहां पर भारी गंदगी व दुर्व्यवस्था होने के बाद भी न तो कभी नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी यहां पर जाते हैं और न ही नगर पंचायत के अध्यक्ष । ऐसे में जिला प्रशासन की उपेक्षा के शिकार कांशीराम आवासीय फ्लैटों में रहने वाले परिवार नारकीय जीवन जीने की मजबूर है।
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