कौलापुर/ज्ञानपुर (भदोही)। डब्ल्यूडब्ल्यूई के रिंग में बड़े-बड़े महारथियों को चारों खाने चित करने वाले रिंकू सिंह राजपूत उर्फ वीर महान सोमवार को अपने पैतृक आवास गोपीगंज के होलपुर पहुंचे। इस दौरान अमर उजाला ने उनके साथ बातचीत की। रिंकू सिंह राजपूत ने अपने संघर्षपूण जीवन के साथ सनातन संस्कृति, राजनीतिक विचारधारा और अपनी शादी पर खुल कर बात की। उन्होंने भविष्य की अपनी तैयारियों पर भी चर्चा की। सवाल- अब तक कैसी रही है आपकी जीवन यात्रा?
जवाब- एक ट्रक ड्राइवर का बेटा होने से लेकर अमेरिका में डब्ल्यूडब्ल्यूई की अब तक की यात्रा काफी चुनौतीपूर्ण रही है। शुरुआत जैवलिन थ्रोअर के रूप में की। जैवलिन के लिए पैसे न होने पर पिता जी के ट्रक के पहिए से निकले नट को पिघलाकर बांस की लड़की में डाला और उससे पांच किलो का जैवलिन बनाया। इसके बाद बेसबॉल और अब डब्ल्यूडब्ल्यूई के रिंग में हूं। जीवन में ऐसा दौर भी आया जब मैंने आर्मी के लिए ट्रायल किया था, लेकिन अंडरएज होने के कारण सेलेक्शन नहीं हो पाया। देखा जाए तो अब तक की यात्रा आसान नहीं रही। इसमें माता-पिता और ईश्वर का आशीर्वाद रहा।
सवाल- परिवार का कैसा रहा है सहयोग?
जवाब- हर माता-पिता की तरह हमारे मां और पिता जी शुरू में थोड़ा डरे, लेकिन कड़ी मेहनत और लगन हर सवाल का जवाब होता है। मेरी मां ने हमेशा संस्कारों की सीख दी और कहा दुनिया में कहीं भी रहें अपने संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए। मैं आज तक माता-पिता की सीख का पालन कर रहा हूं।
सवाल- अध्यात्म आपको कितना मजबूत करता है?
जवाब - मेरे जीवन में अध्यात्म का वहीं स्थान है, जो माता-पिता का हैं। अध्यात्म के बिना जीवन सूना रहता है। जब मैं रिंग में होता हूं या प्रैक्टिस में, लगातार अध्यात्म से जुड़ा रहता हूं। ईश्वर की अराधना हमें वह उर्जा प्रदान करती है, जो अंदर से मजबूत करती है। मेरा मानना है कि जिस दिन हम अध्यात्म से दूर हो गए, उस दिन हमारा पतन निश्चित है। उन्होंने युवाओं से सनातन संस्कृति से जुड़ने का आह्वान किया।
सवाल- आपकी कोई राजनीतिक विचारधारा भी है?
जवाब- अक्सर सनातन संस्कृति के प्रति मेरे जुड़ाव के कारण लोग किसी पार्टी विशेष से जुड़ाव समझते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। वैश्विक स्तर पर देश की सनातन संस्कृति का ध्वज लहराना और राष्ट्रप्रेम हर व्यक्ति का कर्तव्य होता है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मेरी कोई राजनीतिक विचारधारा हो। देश का हर व्यक्ति, वह चाहे किसी भी कोने में हो, उसे भारत की संस्कृति का गुणगान करना चाहिए।
सवाल- पिता जी के स्वर्गवास के बाद जीवन में कितना खालीपन आया है?
जवाब- माता-पिता जीवन में उस छांव की तरह होते हैँ, जिसके नीचे बैठकर हम सुस्ताते हैँ, लेकिन जब माता-पिता की छाया सर से उठ जाती है तो हम प्यास से तड़पते पक्षी की तरह हो जाते हैं, लेकिन उनकी सीख और संस्कार हमें जीवन में खड़े रहने का साहस देते हैं।
सवाल- देश के आइडियल वीर महान शादी कब कर रहे हैं?
जवाब- अभी हमारा लक्ष्य सिर्फ भारत माता की सेवा करना है और पूरे विश्व में भारत की सनातन संस्कृति और विचारों का ध्वज पहुंचाना है। आने वाले समय में कई टूर्नामेंट हैं, जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व करना है। मेरा सारा फोकस उसी पर हैं।
सवाल-जिले के युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए कोई योजना?
जवाब- देश का युवा राष्ट्रप्रेमी और सनातन प्रेमी है। फिलहाल भविष्य में क्या करना है, इसपर विचार नहीं किया है, लेकिन शाकाहारी युवाओं को भरपूर मात्रा में प्रोटीन उपलब्ध कराने के लिए वीगन प्रोटीन की शुरूआत करने जा रहे हैं। इसके अलावा जिम, ट्रेनिंग सेंटर को लेकर भी भविष्य की योजना है, लेकिन अभी कुछ विशेष नहीं हैँ।