नोटबंदी के 22वें दिन भी बैंकों और एटीएम पर करेंसी के लिए लोगों की कतारें नहीं टूटीं। पैसे के लिए जारी गहमागहमी के बीच बुधवार को बैंक काउंटरों पर नोकझोंक बढ़ गई। कुछ बैंकों पर अधिकतम दो से तीन हजार रुपये ही उपभोक्ताओं को दिए गए तो कुछ में करेंसी न होने का बोर्ड लगा मिला। इस पर उपभोक्ताओं का गुस्सा भड़क उठा। लोगों ने हो-हल्ला भी मचाया।
छतमी के विपुल कुमार कौलापुर स्थित यूनियन बैंक की शाखा में पैसे के लिए सुबह कतार में लगे। लंबे समय तक लाइन में लगे रहने के बाद वह ऊब गए और निराश होकर चले गए। उन्होंने बताया कि लाइन में इस उद्देश्य से लगा था कि घंटे-आध घंटे में पैसे मिल जाएंगे, लेकिन दो घंटे कतार में लगे रहने के बाद भी नंबर नहीं आया। लाइन बेहद धीमी गति से आगे खिसक रही थी। इस बीच कतार में लगे लोगों ने बताया कि बैंक में केवल दो से तीन हजार रुपये ही मिल रहे हैं। शादी-आयोजन के नाम पर भी ज्यादा धनराशि नहीं मिल रही है। इससे निराश होकर लाइन छोड़ दी और घर लौट गए। पंजाब नेशनल बैंक की माधोसिंह शाखा में बुधवार को कैश न होने का बोर्ड लगा दिया गया। इससे लेनदेन के लिए पहुंचे उपभोक्ताओं की नाराजगी बढ़ गई। गुस्साए लोगों ने खूब शोरशराबा किया। इस बैंक में मंगलवार को भी उपभोक्ताओं ने हंगामा किया था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यहां मारपीट की नौबत बन गई थी। इसके बाद बैंक अधिकारियों को पुलिस बुलानी पड़ी थी। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बैंक अधिकारी कुछ खास और बड़े लोगों को ज्यादा रकम दे दे रहे हैं, जबकि सामान्य लोगों को अपने ही पैसे के लिए जूझना पड़ रहा है। इसी तरह ज्ञानपुर नगर के अलावा सुरियावां, भदोही, गोपीगंज, औराई, महाराजगंज, चौरी आदि इलाकों के जिन बैंकों में पैसे थे, वहां पूरे दिन लोगों की कतारें लगी रहीं।
सूत्रों की मानें तो कई बैंकों ने नोटबंदी के बाद के अपने लेनदेन का ब्योरा उच्चाधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराया है। ऐसे बैंकों में ही पैसे नहीं भेजे जाने के कारण कैश की किल्लत हो रही है। दूसरी ओर एटीएम पर लोगों की भारी भीड़ जमा रही। एटीएम एक बार में दो हजार रुपये से ज्यादा पैसे नहीं उगल रहे हैं और एक दिन में एक ही ट्रांजैक्शन हो पा रहा है। बुधवार को गोपीगंज स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम पर लंबी कतार लगी। लोगों की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। ज्यादातर बैंकों के एटीएम बंद चल रहे हैं। इससे लोगों को और मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि सभी बैंकों को अपने-अपने एटीएम में पैसे डालने चाहिए, ताकि बैंकों में लोगों की भीड़ कम हो सके।