प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि बीएड के विभागाध्यक्ष डॉ.श्रीनिवास पांडेय ने फीता काटकर, दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इसके बाद चित्रकला के छात्र कलाकारों के कैनवास पर उकेरे कलाओं का अवलोकन किया।
कला की प्रस्तुति देख उन्होंने छात्र कलाकारों के प्रयास की लोगों ने सराहना की।
डॉ.पांडेय ने कहा कि रंग तरंगो के माध्यम से सामाजिक रिश्तों में जकड़े स्त्री-पुरूष के ताने-बानों का आभास हुआ।
वास्तव में मानव जीवन की पूर्णता प्रकृति के साथ हो पाती है। प्रकृति के इतर हम अपने को आनंदों से वंचित रखने का प्रयास करते हैं।
प्रदर्शनी में जीवन के विविध आयाम परिलक्षित कराए गए हैं। चीफ प्रॉक्टर डॉ. सविता भारद्वाज ने प्रदर्शनी पर अप्रतिम,अलौकिक जैसे शब्द से भाव व्यक्त की।
कहा कि प्रदर्शनी में चिंतन, चेतना समाहित है। डॉ.चंद्र प्रकाश ने कहा कि कला के माध्यम से जीवन कैसे रंग भरती है, देखने को मिला।
डॉ. भारतेंदु द्विवेदी ने कहा कि प्रदर्शनी से सांस्कृतिक विरासत के नए आयामों को रेखांकित किया है। विभागाध्यक्ष डॉ.रोशन प्रसाद ने छात्रों संग प्रदर्शनी पर प्रकाश डाला।
इस मौके पर डॉ.जेपी मिश्र, डॉ.डीएन सिंह, डॉ.आलिया रिफत, डॉ.महेंद्र त्रिपाठी, डॉ. किरण शर्मा, डॉ. दीप नारायण, डॉ.आरआर यादव, राज कुमार श्रीवास्तव, डॉ.सविता श्रीवास्तव आदि रहे।