ज्ञानपुर। किसानों के अथक परिश्रम और मोटी लागत के बाद खेत में खड़ी हुई धान की फसल पर बीमारियों ने हमला बोल दिया है। कई इलाकों के धान की फसल खैरा, झुलसा और जीवाणु झुलसा रोग से पीली पड़ने लगी है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को आगाह करते हुए समय रहते दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी है।
भदोही जिले के डीघ, औराई, भदोही, ज्ञानपुर और अभोली ब्लॉकों के कई किसानों की धान की फसल में खैरा रोग लगने लगा है। इसमें जिंक की कमी से पत्तियां काली पड़ने लगती हैं। इसी तरह झुलसा रोग में आंख सदृश कत्थई रंग के दाग-धब्बे धान के पौधों की पत्तियों पर आ जाते हैं। ध्यान न दिया जाए तो धीरे-धीरे पौधा सूख जाता है। जीवाणु झुलसा रोग में पत्ती के नुकीले हिस्से लेकर किनारे-किनारे जीवाणु के असर से पौधा सूखता चला जाता है। इससे फसल को काफी नुकसान हो सकता है। इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरपी चौधरी ने कहा कि खैरा, झुलसा और जीवाणु झुलसा रोग से जुड़ी कई किसानों की शिकायतें मिली हैं। तकरीबन सात से आठ किसान प्रतिदिन इस तरह की समस्याएं लेकर केवीके पहुंच रहे हैं। इन बीमारियों का समय पर उपचार होना जरूरी है। खैरा रोग से बचने के लिए किसान 20 ग्राम यूरिया में पांच से छह ग्राम मोनो जिंक प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं। झुलसा रोग पत्तियों से लेकर पौधे केजड़ क्षेत्र तक पहुंच जाता है। इससे बचाव के लिए प्रोपीकोनाजोल दो एमएल प्रतिलीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। जीवाणु झुलसा रोग से बचने के लिए एक ग्राम प्लांटो माइसीन और तीन ग्राम कॉपरऑक्सी क्लोराइड मिश्रण प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए। सभी दवाओं का छिड़काव कम से कम दो बार जरूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विशेष स्थिति में किसान रोग लगे पौधे का सैंपल लेकर कृषि विज्ञान केंद्र पर भी आ सकते हैं।
-