ज्ञानपुर। शस्त्र लाइसेंस लेने के लिए लोगों में मारामारी मची है। लाइसेंस के लिए ढाई हजार से अधिक लोगों ने आवेदन किया है। मगर उस पर रिपोर्ट लगवाने में पसीने छूट रहे हैं। चार माह पूर्व पत्रावली पूर्ण करने वाले 115 लोगों को लाइसेंस मिल गया, जबकि 500 से अधिक के आवेदन निरस्त हो गए।
पांच वर्ष बाद सरकार ने 12 अक्तूबर 2018 को शस्त्र लाइसेंस पर लगी रोक हटा ली। इसके बाद कलेक्ट्रेट में शस्त्र लाइसेंस आवेदन करने वालों की भीड़ उमड़ने लगी। असलहा लाइसेंस की चाहत इतनी बढ़ी की नेता से लेकर अभिनेता, शिक्षक से लेकर प्रबंधक और ठेकेदार से लेकर कोटेदार सभी आवेदन कर दिए। उसके बाद थाना, कोतवाली, तहसील, पुलिस लाइन से लेकर कलेक्ट्रेट की परिक्रमा का दौर शुरू हो गया। करीब चार से पांच माह पूर्व 115 के करीब असलहा लाइसेंस जारी हुए जिसमें 70 से अधिक लोग भाजपा से जुड़े रहे। भगवा कपड़े पहनकर एसपी- डीएम कार्यालय से लेकर कोतवाली तक सैकड़ों लोग पहुंच रहे लेकिन गिने-चुने लोगों की सुनवाई प्रशासन कर रहा है। जांच प्रक्रिया पूरी कराने से लेकर असलहा लाइसेंस बनवाने में दलाल भी सक्रिय हो गए। लोकसभा चुनाव में आचार संहिता लगने से लाइसेंस जारी नहीं हुए लेकिन चुुनाव खत्म होने के बाद एक बार फिर गणेश परिक्रमा शुरू हो गई है। आवेदकों की संख्या अधिक होते देख सत्तासीन लोगों के आवेदनों को छोड़ कर अन्य के अभिलेखों को प्रशासन की ओर से दोबारा सत्यापन के लिए थाना, कोतवाली और तहसील भेजा जा रहा है। आवेदन करने वाले भी लाइसेंस पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। संतरी से लेकर मंत्री तक से पैरवी कराने से नहीं चूक रहे। बताते चलें कि जिले में वर्तमान समय में 5500 से अधिक असलहा लाइसेंस थे, लेकिन अब इसकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।