एक सप्ताह में सवा तीन मीटर बढ़ी गंगा
दो सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा गंगा का जलस्तर
बारिश और टोंस नदी का पानी आने से बढ़ने लगी घाटों की ओर
जलमग्न हुए रेत के टीले, चौड़ा होने लगा पाट
अमर उजाला ब्यूरो
सीतामढ़ी। बारिश और टोंस नदी का जल आने के कारण गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। सप्ताह भर के अंदर गंगा के जलस्तर में लगभग सवा तीन मीटर की बढ़ोतरी हो गई है। इससे तटवर्ती गांवों में अभी चिंता की बात नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि बढ़ोतरी की गति यही रही तो गंगा जल्द ही गांवों की ओर बढ़ने लगेगी। सीतामढ़ी में खतरे का निशान 80 मीटर पर माना जाता है। इसके बाद कटान तेज हो जाता है।
बारिश के पानी से गंगा का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि शुक्रवार को जलस्तर बढ़ाव की दर में मामूली कमी आई। दोपहर बाद जलस्तर दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ रहा था। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी कार्यालय के अनुसार इस वर्ष गंगा का न्यूनतम जलस्तर 65.460 मीटर रहा था। वर्तमान में जगह-जगह हो रही बारिश और टोंस नदी का पानी गंगा में आने के कारण महज एक सप्ताह में ही जलस्तर में सवा तीन मीटर की बढ़ोतरी हुई है। बृहस्पतिवार को केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी स्थित मीटर गेज पर गंगा का जलस्तर 67.460 मीटर दर्ज किया गया था, जो शुक्रवार को बढ़ कर 68.840 मीटर पर पहुंच गया। इस तरह जलस्तर में 3.380 मीटर की वृद्धि हो चुकी है। पिछले दिनों गंगा में पानी काफी कम था, जिससे गंगा में कई जगह रेत के टीले दिख रहे थे, लेकिन, सवा तीन मीटर की बढ़ोतरी के बाद पानी घाटों तक आकर हिलोरें मारने लगा है। रेत के टीले धीरे-धीरे पानी से डूबने लगे हैं।
हालांकि तीन ओर गंगा से घिरे कोनिया क्षेत्र में इतने पानी से कोई परेशानी की बात नहीं मानी जा रही है, लेकिन बारिश के दिनों में जैसे ही गंगा के जलस्तर में बढ़ाव शुरू होता है, कोनिया क्षेत्र के कटान प्रभावित गांवों छेछुआ और भुर्रा के किसानों की नींद उड़ जाती है। क्योंकि गंगा में बाढ़ आते ही दोनों गांवों के किसानों की खेती योग्य कीमती जमीनें कटान की भेंट चढ़ने लगतीं है। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी गेज पर शुक्रवार दोपहर बाद तीन बजे तक जल स्तर 68.840 पर पहुंच गया था।