अयोध्या के विवादित ढांचा विध्वंस मामले में भाजपा के शीर्ष नेताओं पर केस चलाने को लेकर भले ही समूचे देश में हंगामा मचा हो, लेकिन विध्वंस को बेहद नजदीक से देख चुके रणजीत सिंह की राय थोड़ी अलग है।
विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन विभाग मंत्री रहे ज्ञानपुर से लगे पूरेगोसाईंदास गांव निवासी रणजीत सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में दावा किया कि ढांचा विध्वंस के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। विध्वंस केवल जनाक्रोश की परिणति थी। अब इतने दिनों बाद सीबीआई का कुछ खास नेताओं पर कानूनी कार्रवाई समझ से परे है।
कहा कि छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा को ढहा दिया गया था। उस वक्त विहिप के अयोध्या स्थित रामकथा कुंज कार्यालय के प्रभारी की जिम्मेदारी देख रहे विभाग मंत्री रणजीत सिंह कहते हैं कि कारसेवकों के एक कार्यक्रम के दौरान अयोध्या में सात लाख के आसपास भीड़ जुटी थी। देश-विदेश से आ रहे मेहमानों के स्वागत की जिम्मेदारी भी मेरी थी। कार्यक्रम के दौरान भीड़ में से आवाज आई तोड़ दो और भीड़ उग्र हो गई। 11.30 बजे से 4.45 बजे तक तीनों गुंबद धराशायी कर दिए गए और 36 घंटे में वहां से मलबा हटाया गया। सबकुछ खुल्लम-खुल्ला हुआ। कोई साजिश नहीं रची गई। इसके लिए कुछ गिनती के नेताओं को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। अलबत्ता मंच पर मौजूद तमाम नेता कारसेवकों को रोकने का प्रयास कर रहे थे। उस समय मंच पर अशोक सिंहल, राम विलास वेदांती, नृत्य गोपाल दास, चौगुरजी बाबा, एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे कई नेता मौजूद थे। कहा कि गुंबद गिरने लगा और भगदड़ मच गई। मलबा गिरने से कई कारसेवक घायल हो गए। मुझे एंबुलेंस बुलाने के लिए एनाउंस करने को कहा गया। मैंने एंबुलेंस बुलवाई और घायलों को अस्पताल भेजा जाने लगा। श्रीराम हास्पिटल पूरी तरह भर गया। 350 घायलों की सूची मेरे पास ही थी।
उल्लेखनीय है कि 1982 में विहिप से जुडने के बाद रणजीत सिंह ने संगठन में कई अहम भूमिकाएं निभाईं। वह भारतीय गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन परिषद, राष्ट्रीय गोरक्षा आंदोलन समिति और गोहत्या, गोमांस निर्यात निरोध परिषद के प्रांत महामंत्री भी बनाए गए थे। 2014 लोकसभा चुनाव से पूर्व उन्होंने भाजपा की सदस्यता ले ली।